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अनुगमन वेग क्या है ?

अनुगमन वेग क्या है ?

प्रश्न- मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग से आप क्या समझते हैं? इलेक्ट्रॉन अनुगमन वेग के सिद्धान्त द्वारा ओम के नियम का निगमन कीजिए। 2011, 12, 17, 18, 19)अनुगमन वेग क्या है ?
या
किसी चालक के विभवान्तर तथा मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह (अनुगमन) वेग के बीच का सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2012, 18)
या
किसी चालक के बीच विभवान्तर तथा मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग के बीच सम्बन्ध स्थापित कीजिए। (2013)
या


मुक्त इलेक्ट्रॉनों के ‘अपवाह वेग’ से आप क्या समझते हैं? मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग के आधार पर ओम के नियम की व्याख्या कीजिए। (2014, 18, 19)
या
अनुगमन वेग की परिभाषा दीजिए। । (2014, 19, 20)
या
मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग से आप क्या समझते हैं? (2015)
या
किसी धातु में मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग से क्या तात्पर्य है? मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग के आधार पर ओम का नियम व्युत्पन्न कीजिए।(2017, 18)

अनुगमन वेग क्या है ?

अनुगमन वेग (अपवाह वेग) — किसी धातु के तार के सिरों को बैटरी से जोड़ देने पर तार के सिरों के बीच एक विभवान्तर स्थापित हो जाता है। इस विभवान्तर अथवा वैद्युत-क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉन एक वैद्युत बल का अनुभव करते हैं जो इलेक्ट्रॉनों को त्वरण प्रदान करता है। परन्तु इस त्वरण से इलेक्ट्रॉनों की चाल लगातार बढ़ती नहीं जाती, बल्कि धातु के धन आयनों से से टकराकर ये इलेक्ट्रॉन बैटरी से प्राप्त ऊर्जा को खोते रहते हैं।

स्पष्ट है कि बैटरी का विभवान्तर इलेक्ट्रॉनों को त्वरित गति प्रदान नहीं कर पाता बल्कि तार की लम्बाई के अनुदिश एक लघु नियत वेग ही दे पाता है जो इलेक्ट्रॉनों की अनियमित गति पर आरोपित हो जाता है। इलेक्ट्रॉनों के इस लघु नियत वेग को ही ‘अनुगमन वेग’ (drift velocity) कहते हैं। इसे Vd से प्रदर्शित करते हैं।

ओम के नियम का निगमन

-माना एक धातु के तार की लम्बाई । तथा अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल A है। जब इसके सिरों के बीच विभवान्तर V लगाया जाता है, तो इसमें वैद्युत धारा i प्रवाहित होने लगती है। यदि तार वे प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या (मुक्त इलेक्ट्रॉन-घनत्व)n हो तथा इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग Vd हो, तब
i = neAvd ………………(1)
E = V/l

इस क्षेत्र द्वारा प्रत्येक मुक्त इलेक्ट्रॉन पर आरोपित बल F = eE = eV /l यदि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान m हो, तो इस बल के कारण इलेक्ट्रॉन में उत्पन्न त्वरण
a = F/m=eV/ml …………..(2)
तार के भीतर मुक्त इलेक्ट्रॉन धातु के धन आयनों से बारम्बार टकराते रहते हैं। किसी धन आयन से टकराने के पश्चात् इलेक्ट्रॉन का वेग वैद्युत-क्षेत्र E की

विपरीत दिशा में बढ़ने लगता है। यदि किसी इलेक्ट्रॉन की, धन आयनों से हुई दो क्रमागत टक्करों के बीच का समयान्तराल τ है, तो इलेक्ट्रॉन के वेग में aτ वृद्धि होगी। यदि किसी क्षण वैद्युत-क्षेत्र की अनुपस्थिति में किसी इलेक्ट्रॉन का ऊष्मीय वेग u₁ है, तब वैद्युत क्षेत्र E की उपस्थिति में उसका वेग बढ़कर ( u₁ + a τ₁) हो जाएगा जहाँ τ₁ उस इलेक्ट्रॉन का दो क्रमागत टक्करों के बीच का समयान्तराल है। इसी प्रकार, अन्य इलेक्ट्रॉनों के वेग (u₂ + a τ₂), (u₃+ aτ₃) होंगे। सभी n इलेक्ट्रॉनों का औसत वेग ही मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग vd है। इस प्रकार

vd ={( u₁ + a τ₁)(u₂ + a τ₂)+….+(uₙ+ aτₙ)}/n
=( u₁+u₂ +……. uₙ)/n+a{(τ₁+τ₂…….+τₙ)}/n
परन्तु ( u₁ + u₂ +……. uₙ)/n= मुक्त इलेक्ट्रॉनों का औसत ऊष्मीय वेग
परन्तु यह शून्य होता है तथा (τ₁+ τ₂…….+τₙ)/n= τ= इलेक्ट्रॉनों का दो क्रमागत टक्करों के बीच का ‘औसत’ समयान्तराल है जिसे श्रान्तिकाल (relaxation time) कहते हैं।
vd=0+ aτ अथवा Vd =aτ …(3)
समीकरण (2) से a का मान समीकरण (3) में रखने पर, eV evt
vd = eVτ/ml अथवा vd = eVτ/ml

यह तार में मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन वेग तथा तार के सिरों के बीच विभवान्तर V में सम्बन्ध है।
vd का यह मान समीकरण (1) में रखने पर,
i = neA(eVτ/ml)
अर्थात् i = ne²AVτ/ml
अर्थात् V/i = ml/ne²τΑ
ml/ne²τΑ एक निश्चित ताप पर दिये गये तार के लिए एक नियतांक (constant) है। इसे तार का वैद्युत प्रतिरोध R कहते हैं।
अर्थात् R =ml/ne²τΑ
V/i = R (नियतांक)
यही ओम का नियम है।

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Some Important Physics Questions

प्रश्न 1- हाइड्रोजन परमाणु की nवीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा Eₙ= -13.6/n² इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) सूत्र से दी जाती है। इसके आधार पर
(i) n=1,2,3,4,5,6 तथा ० के लिए विभिन्न ऊर्जा स्तरों की खींचिए।
(ii) विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक संक्रमणों द्वारा हाइड्रोजन परमाणु के उत्सर्जन स्पेक्ट्रम की लाइमन तथा बॉमर श्रेणियों को प्रदर्शित कीजिए।(2015, 17)