अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना free pdf

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अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना

प्रश्न- अवतल दर्पण के सम्मुख विभिन्न स्थितियों में रखी वस्तु के दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्बों की स्थिति एवं के प्रकृति चित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना-अवतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की स्थिति, आकार एवं प्रकृति, दर्पण से वस्तु की दूरी पर निर्भर करती है

जब वस्तु अनन्त दूरी पर है

अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना

1- जब वस्तु अनन्त दूरी पर है-चित्र 8. 12 (a) में अनन्त दूरी पर रखी वस्तु से चलने वाली किरणें परस्पर समान्तर होती हैं । एक किरण, जो फोकस F से होकर जाती है, परावर्तन के पश्चात मुख्य अक्ष के समान्तर हो जाती है। दूसरी किरण, जो वक्रता केन्द्र C से होकर आती है, परावर्तन के पश्चात उसी मार्ग पर लौट जाती है। ये दोनों परावर्तित किरणें दर्पण के फोकस तल के एक ही बिन्दु B’ पर मिलती हैं। अतः B’, B का प्रतिबिम्ब है। A का प्रतिबिम्ब A ,फोकस F पर बनता है । इस प्रकार वस्तु AB का सम्पूर्ण प्रतिबिम्ब A’B’ है।
यह प्रतिबिम्ब अवतल दर्पण के फोकस तल में स्थित है तथा वास्तविक, उल्टा एवं वस्तु से बहुत छोटा बनता है।

जब वस्तु अनन्तता एवं वक्रता केन्द्र के बीच रखी हो

अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना

2- जब वस्तु अनन्तता एवं वक्रता केन्द्र के बीच रखी हो—चित्र 8-12 (b) में वस्तु AB, अवतल दर्पण के सम्मुख उसकी वक्रता-त्रिज्या से अधिक दूरी पर रखी है। बिन्दु B से
मुख्य अक्ष के समान्तर चलने वाली किरण BE, परावर्तन के पश्चात फोकस F से होकर जाती है। दूसरी किरण BG, जो वक्रता केन्द्र C से होकर जाती है परावर्तन के पश्चात उसी मार्ग से लौट आती है। ये दोनों परावर्तित किरणें B’ पर मिलती हैं, जो B का वास्तविक प्रतिबिम्ब है। B’ से मुख्य अक्ष पर खींचा गया लम्ब A’B’, वस्तु AB का सम्पूर्ण प्रतिबिम्ब है ।
यह प्रतिबिम्ब दर्पण के वक्रता केन्द्र C तथा मुख्य फोकस F के बीच में वास्तविक,उल्टा और वस्तु से छोटा बनता है

जब वस्तु वक्रता-केन्द्र पर रखी हो
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना

3– जब वस्तु वक्रता-केन्द्र पर रखी हो—चित्र 8. 12 (c) में वस्तु AB. अवतल दर्पण के वक्रता केन्द्र C पर रखी है। इसमें B से मुख्य अक्ष के समान्तर चलने वाली आपतित किरण
परावर्तित होकर फोकस F से होकर जाती है। दूसरी आपतित किरण BG, जो फोकस F में से होकर जाती है, परावर्तन के
पश्चात मुख्य अक्ष के समान्तर हो जाती है। ये दोनों किरणें बिन्दु B’ पर मिलती हैं। यही B का वास्तविक प्रतिबिम्ब है। B’ से मुख्य अक्ष पर खींचा गया लम्ब A’B’, वस्तु AB का सम्पूर्ण प्रतिबिम्ब है।
यह प्रतिबिम्ब दर्पण के वक्रता केन्द्र पर है एवं वस्तु के समान आकार का, वास्तविक तथा उल्टा है।

जब वस्तु वक्रता केन्द्र तथा फोकस के बीच रखी हो
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना

4- जब वस्तु वक्रता केन्द्र तथा फोकस के बीच रखी हो—चित्र 8. 12 (d) में वस्तु AB; दर्पण के मुख्य फोकस F
तथा वक्रता केन्द्र C के बीच में स्थित है । B से मुख्य अक्ष के समान्तर चलने वाली किरण BE, परावर्तित होकर मुख्य फोकस F से होकर जाती है। दूसरी आपतित किरण BG, जो मुख्य फोकस F से होकर आती है, परावर्तित होकर मुख्य अक्ष के समान्तर हो जाती है । ये दोनों किरणें एक-दूसरे को B’ पर काटती हैं जो B का प्रतिबिम्ब हैं । B’ से मुख्य अक्ष पर डाला गया लम्ब A’B’,वस्तु ABका सम्पूर्ण प्रतिबिम्ब है।
यह प्रतिबिम्ब दर्पण के वक्रता केन्द्र तथा अनन्तता के बीच स्थित है एवं वास्तविक, उल्टा व वस्तु से बड़ा है।

जब वस्तु मुख्य फोकस पर रखी हो
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना

5-जब वस्तु मुख्य फोकस पर रखी हो—चित्र 8. 12 (e) में वस्तु AB, मुख्य फोकस F पर स्थित है। B से मुख्य अक्ष के समान्तर चलने वाली आपतित किरण BE, परावर्तित होकर मुख्य फोकस F से होकर जाती है। इसी बिन्दु B से चलने वाली दूसरी आपतित किरण BG जो पीछे बढ़ाने पर वक्रता केन्द्र C से गुजरती है, दर्पण से परावर्तित होकर उसी मार्ग पर लौट आती है। ये दोनों परावर्तित किरणें समान्तर होने के कारण अनन्तता पर अक्ष के नीचे मिलती हैं।
यह प्रतिबिम्ब अनन्तता पर बनता है तथा वास्तविक, उल्टा व वस्तु से बड़ा होता है।

जब वस्तु ध्रुव तथा फोकस के बीच रखी हो
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना

6- जब वस्तु ध्रुव तथा फोकस के बीच रखी हो-चित्र 8.12 (f) में वस्तु AB; अवतल दर्पण के फोकस एवं ध्रुव के बीच रखी है। इसमें B से मुख्य अक्ष के समान्तर चलने वाली किरण BN,परावर्तित होकर मुख्य फोकस F से होकर जाती है। दूसरी किरण BE दर्पण पर अभिलम्बवत् गिरती है। यह परावर्तित होकर उसी मार्ग पर लौट आती है। ये दोनों परावर्तित किरणें दर्पण के पीछे B’ से आती हुई प्रतीत होती हैं। अत: B’,B का आभासी प्रतिबिम्ब है ।B’ से मुख्य अक्ष पर डाला गया लम्ब B’A’ ही वस्तु AB का सम्पूर्ण प्रतिबिम्ब है। यह प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे, आभासी, सीधा व आकार में वस्तु से बड़ा होता है।

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