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एक विभवमापी की संरचना तथा कार्यविधि वर्णन कीजिए

प्रश्न- एक विभवमापी की संरचना तथा कार्यविधि का वर्णन कीजिए। इसके द्वारा सेल का विद्युत वाहक बल कैसे ज्ञात किया जाता है? (2011)
या
विभवमापी का सिद्धान्त समझाइए। विभवमापी से किसी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए परिपथ आरेख खींचिए तथा प्रयुक्त सूत्र को प्राप्त कीजिए। (2013, 15)
या
विभवमापी का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। इसकी सहायता से किसी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध कैसे ज्ञात करते हैं?(2015)
या
विभवमापी की संरचना तथा कार्यविधि का वर्णन कीजिए। इसके द्वारा दो सेलों के वि० वाहक बल की तुलना कैसे की जाती है? परिपथ आरेख बनाकर समझाइए। (2015)

विभवमापी की संरचना

एक विभवमापी की संरचना तथा कार्यविधि वर्णन कीजिए

विभवमापी में मुख्यतः एक उच्च विशिष्ट प्रतिरोध व निम्न प्रतिरोध ताप गुणांक की मिश्रधातु (जैसेकॉन्सटेन्टन, मैंगनिन आदि) का 4 से 12 मीटर तक लम्बा एक समान व्यास का तार होता है। इस तार को एक-एक मीटर के समान्तर टुकड़ों के रूप में चित्र की भाँति एक लकड़ी के तख्ते पर बिछा देते हैं। तार के ये सभी टुकड़े ताँबे की मोटी पत्तियों के द्वारा श्रेणीक्रम में जोड़ दिये जाते हैं। इस सम्पूर्ण तार के प्रारम्भ होने वाले सिरे और अन्तिम सिरे पर क्रमशः संयोजक पेंच A और B लगा देते हैं। तारों की लम्बाई के समान्तर एक मीटर पैमाना M लगा रहता है, जिससे जौकी J की स्थिति पढ़ ली जाती है।

कार्यविधि अथवा कार्य सिद्धान्त–उपरोक्त विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 5 में पढ़िए।

विभवमापी द्वारा किसी सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करना

इसके लिए विभवमापी के तार AB के सिरों के बीच एक संचायक सेल B₁, धारा नियन्त्रक Rh व कुंजी K₁, चित्र के अनुसार जोड़ देते हैं। सेल B₁ का धन-ध्रुव तार के सिरे A से जोड़ा जाता है। अब जिस सेल का आन्तरिक प्रतिरोध r ज्ञात करना होता है, उसके धन सिरे को बिन्दु A से तथा ऋण सिरे को एक शण्टयुक्त धारामापी G द्वारा जौकी J से जोड़ देते हैं। इस सेल के समान्तर क्रम में चित्र के अनुसार एक प्रतिरोध बॉक्स व कुंजी K₂ डाल देते हैं। सर्वप्रथम कुंजी K₂ से प्लग को निकालकर सेल E को खुले परिपथ में रखा जाता है।

अब कुंजी K₁ का प्लग लगाकर सेल E के लिए शून्य विक्षेप स्थिति ज्ञात कर लेते हैं। मान लीजिए कि इस स्थिति में सिरे A से दूरी l₁ सेमी है। चूँकि खुले परिपथ पर सेल की प्लेटों के बीच विभवान्तर V इसके विद्युत वाहक बल E के बराबर है, अत:
E = Kl₁ ……….(1)
जहाँ K तार AB की विभव-प्रवणता है।

अब प्रतिरोध बॉक्स में से कोई उचित प्रतिरोध R निकालकर कुंजी K₂ को बन्द कर देते हैं। इस दशा में प्रतिरोध R के सिरों के बीच लगने वाले विभवान्तर V के लिए तार AB पर शून्य विक्षेप स्थिति ज्ञात कर लेते हैं। माना इस स्थिति की बिन्दु A से दूरी l₂ सेमी है, तब

एक विभवमापी की संरचना तथा कार्यविधि वर्णन कीजिए

समी० (1) को समी० (2) से भाग देने पर
E/V=Kl₁/Kl₂ अथवा E/V = l₁/l₂ …….(3)
परन्तु सेल का आन्तरिक प्रतिरोध r = R(E/V -1) ……(4)
समी० (3) से E/V का मान समी० (4) में रखने पर
r =R(l₁/l₂-1) ………….(5)

इस सूत्र (5) से r के मान का परिकलन किया जा सकता है। l₁ व l₂ के अनेक प्रेक्षण लेते हैं और प्रत्येक प्रेक्षण से सेल के आन्तरिक प्रतिरोध का परिकलन करके औसत मान ज्ञात कर लेते हैं।

विभवमापी द्वारा दो सेलों के वि० वा० बल की तुलना

पहले विभवमापी के तार के सिरों A व B के बीच एक संचायक सेल अथवा बैटरी B₁, धारा-नियन्त्रक Rh तथा एक कुंजी K₁जोड़ देते हैं। B₁ का धन-ध्रुव तार के A सिरे से जोड़ा जाता है। अब जिन दो सेलों E₁ व E₂ के विद्युत वाहक बलों की तुलना करनी है, उनके धन-ध्रुवों को A से जोड़ देते हैं तथा ऋण-ध्रुवों को एक द्वि-मार्गी (two-way) कुंजी K₂ के द्वारा एक शन्टयुक्त धारामापी G से जोड़कर जौकी J से जोड़ देते हैं।


पहले कुंजी K₁ को लगाकर तार AB के सिरों के बीच विभवान्तर स्थापित करते हैं। अब पहले सेल E₁ को कुंजी K₂ के द्वारा परिपथ में डालते हैं और जौकी के द्वारा शून्य-विक्षेप स्थिति ज्ञात कर लेते हैं। मान लो तार पर शून्य-विक्षेप स्थिति की बिन्दु A से दूरी l₁ सेमी है। तब
E₁ = Kl₁
जहाँ K तार पर विभव-प्रवणता है। इसी प्रकार दूसरे सेल E₂ को कुंजी K₂ के द्वारा परिपथ में डालकर पुन: शून्य-विक्षेप स्थिति ज्ञात कर लेते हैं। मान लो इस स्थिति की बिन्दु A से दूरी l₂ सेमी है। तब
E₂ = Kl₂ अतः E₁/E₂ = l₁/l₂
इस सूत्र से E₁/E₂ की गणना कर सकते हैं।

यदि इनमें एक सेल प्रमाणिक सेल हो, जिसका विद्युत वाहक बल ज्ञात होता है तो दूसरी सेल का विद्युत वाहक बल ज्ञात किया जा सकता है। विभवमापी में शून्य-विक्षेप की स्थिति में, सेल E₁ अथवा E₂ में कोई धारा नहीं बहती अर्थात् सेल खुले परिपथ में होती है। अत: विभवमापी से सेल का यथार्थ विद्युत वाहक बल प्राप्त होता है।

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Some Important Physics Questions

प्रश्न 1- बोर मॉडल के आधार पर हाइड्रोजन परमाणु का ऊर्जा स्तर आरेख खींचिए और स्पेक्ट्रमी रेखाओं के लाइमन, बामर एवं पाश्चन श्रेणियों की उत्पत्ति समझाइए। बामर श्रेणी की प्रथम रेखा का तरंगदैर्घ्य भी परिकलित कीजिए। (2018, 20)

प्रश्न 2- हाइड्रोजन परमाणु की nवीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा Eₙ= -13.6/n² इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) सूत्र से दी जाती है। इसके आधार पर
(i) n=1,2,3,4,5,6 तथा ० के लिए विभिन्न ऊर्जा स्तरों की खींचिए।
(ii) विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक संक्रमणों द्वारा हाइड्रोजन परमाणु के उत्सर्जन स्पेक्ट्रम की लाइमन तथा बॉमर श्रेणियों को प्रदर्शित कीजिए।(2015, 17)