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क्रांतिक कोण को परिभाषित | क्रांतिक कोण तथा अपवर्तनांक में संबंध

प्रश्न 1- क्रान्तिक कोण तथा पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से क्या अभिप्राय है ? सिद्ध कीजिए कि n=1/ sinc , जहाँ संकेतों के सामान्य अर्थ हैं।
या
सिद्ध कीजिए कि सघन माध्यम का अपवर्तनांक क्रान्तिक कोण की ज्या (sine) का व्युत्क्रमानुपाती होगा। (2015, 17)
या
पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की व्याख्या कीजिए तथा क्रान्तिक कोण के महत्त्व को रेखांकित कीजिए। (2015)
या
पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से आप क्या समझते हैं? इसकी आवश्यक शर्ते लिखिए। (2015, 18)

उत्तर– जब कोई प्रकाश-किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है तो इसका अधिकांश भाग अपवर्तित हो जाता है तथा शेष भाग परावर्तित हो जाता है। इस दशा में प्रकाश-किरण अभिलम्ब से दूर हटती है, अतः अपवर्तन कोण का मान आपतन कोण से बड़ा होता है।

क्रांतिक कोण को परिभाषित

अब यदि सघन माध्यम में आपतन कोण (i) को बढ़ाते जायें, तो विरल माध्यम में अपवर्तन कोण (r) का मान भी बढ़ता जाता है। एक विशेष आपतन कोण के लिए अपवर्तन कोण 90° हो जाता है। इस आपतन कोण को ‘क्रान्तिक कोण’ है कहा जाता है तथा ‘C’ से प्रदर्शित करते हैं। अतः क्रान्तिक कोण को निम्न प्रकार से परिभाषित किया जाता है

क्रांतिक कोण को परिभाषित

“सघन माध्यम में बना वह आपतन कोण जिसके लिए विरल माध्यम में बना अपवर्तन कोण समकोण अर्थात् 90° होता है, दोनों माध्यमों के अन्तरापृष्ठ के लिए क्रान्तिक कोण कहलाता है।’

जब यदि माध्यम में आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से आगे थोड़ा-सा ही बढ़ाया जाता है, तो सम्पूर्ण आपतित प्रकाश, परावर्तन के नियमों के अनुसार परावर्तित होकर सघन माध्यम में ही वापस लौट आता है। इस घटना को प्रकाश का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहते हैं।

अत: पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की घटना होने के लिए निम्नलिखित शर्तों का पूरा होना आवश्यक है
1- प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना चाहिए।
2- सघन माध्यम में आपतन कोण का मान क्रान्तिक कोण से बड़ा होना चाहिए।

अपवर्तनांक तथा क्रान्तिक कोण में सम्बन्ध

यदि विरल माध्यम को माध्यम -1 तथा सघन माध्यम को माध्यम -2 से प्रदर्शित करें तो स्नेल के नियम के अनुसार,
sini/sinr = n₁/n₂
क्रान्तिक कोण आपतन पर; i=C तथा r=90°
अत: पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक
₁n₂ = sinC / sin90° =sinC/1
अर्थात् ₁n₂ = sinC ………(1)
परन्तु प्रकाश के उत्क्रमणीयता के सिद्धान्त से,
₁n₂= 1/₁n₂
अतः ₁n₂ = 1/sinC ……..(2)
इस प्रकार क्रान्तिक कोण की ज्या (sin) का व्युत्क्रम विरल माध्यम के सापेक्ष सघन माध्यम के अपवर्तनांक के बराबर होता है।

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