गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना free pdf

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गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना

प्रश्न -गोलीय दर्पणों से प्रतिबिम्ब बनाने के कौन-कौन से नियम हैं?

उत्तर : गोलीय दर्पणों से प्रतिबिम्ब बनाने के नियम-किसी वस्तु का गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब बनाने के लिए निम्नलिखित तीन नियम हैं, परन्तु प्रतिबिम्ब की स्थिति निर्धारित करने के लिए इनमें से किन्हीं दो नियमों को प्रयुक्त करते हैं
(i) गोलीय दर्पण के मुख्य अक्ष के समान्तर आने वाली प्रकाश किरण दर्पण से परावर्तित होकर दर्पण के मुख्य फोकस में से या तो होकर जाती है (अवतल दर्पण में) या मुख्य फोकस से आती हुई प्रतीत होती है (उत्तल दर्पण में) (चित्र 8.4 (a) व (b))।

गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
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(ii) मुख्य फोकस में को होकर जाने वाली (अवतल दर्पण में) अथवा मुख्य फोकस की ओर जाने वाली (उत्तल दर्पण में) किरण,दर्पण से परावर्तित होकर मुख्य अक्ष के समान्तर हो जाती है (चित्र 8.5 (a)व(b))।

गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
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(iii) वक्रता केन्द्र में को होकर जाने वाली (अवतल दर्पण में) अथवा वक्रता केन्द्र की ओर जाने वाली (उत्तल दर्पण में) किरण परावर्तन के पश्चात अपने ही मार्ग पर वापस लौट आती है (चित्र 8.6 (a) व (b))। यह किरण दर्पण पर लम्बवत् गिरती है।

गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
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प्रश्न -जब वस्तु को अनन्त से अवतल दर्पण के समीप लाया जाता है, तो विभिन्न स्थितियों में बने प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा प्रकृति किरण आरेख एवं सारणी बनाकर समझाइए ।


अथवा
अवतल दर्पण के सम्मुख विभिन्न स्थितियों में रखी वस्तु के लिए दर्पण द्वारा प्रतिबिम्बों की स्थिति, आकार एवं प्रकृति की सारणी बनाइए।
अथवा
किसी अवतल दर्पण के सामने वस्तु कहाँ रखें कि वस्तु का प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा बड़ा बने ? आरेखी चित्र बनाइए।

उत्तर : अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना अवतल दर्पण के सम्मुख विभिन्न स्थितियों में रखी वस्तु के दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की स्थिति, आकार एवं प्रकृति अग्रलिखित सारणी में दी गई है

गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना
वस्तु की स्थितिप्रतिबिम्ब की स्थितिवस्तु की तुलना में
प्रतिबिम्ब का आकार
प्रतिबिम्ब की प्रकृतिकिरण-आरेख
1-अनन्त परफोकस (F) परवस्तु सेसे बहुत छोटाउल्टा व वास्तविकचित्र 8.7(a)
2-वक्रता केन्द्र तथा अनन्त के बीचफोकस (F) तथा वक्रता केन्द्र (C) के बीचवस्तु से छोटाउल्टा व वास्तविकचित्र 8.7 (b)
3-वक्रता केन्द्र (C) परक्रता केन्द्र (C) परवस्तु के समान आकार काउल्टा व वास्तविकचित्र 8.7(c)
4-फोकस (F) तथा वक्रता केन्द्र (C) के बीचवक्रता केन्द्र (C) और अनन्त के बीचवस्तु से बड़ाउल्टा व वास्तविकचित्र 8.7 (d)
5-फोकस (F) परअनन्त परवस्तु से बहुत बड़ाउल्टा व वास्तविकचित्र 8.7 (e)
6-फोकस (F) तथा ध्रु (P) के बीचअवतल दर्पण के दूसरी ओरवस्तु से बड़ासीधा व आभासीचित्र 8.7 (f)

इस प्रकार हम देखते हैं कि अवतल दर्पण में केवल एक स्थिति में आभासी, सीधा व बड़ा प्रतिबिम्ब बनता है
जबकि वस्तु दर्पण के ध्रुव तथा फोकस के बीच स्थित होती है [चित्र 8.7 (f)]। शेष सभी स्थितियों में प्रतिबिम्ब वास्तविक व उल्टा बनता है।

प्रश्न -उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना आरेख खींचकर स्पष्ट कीजिए।

अथवा
उत्तल दर्पण और उसके फोकस के बीच स्थित वस्तु के बने प्रतिबिम्ब की स्थिति एवं प्रकृति को किरण-आरेख खींचकर दर्शाइए।

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उत्तर : उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना-चित्र 8. 10 में उत्तल दर्पण द्वारा वस्तु AB के प्रतिबिम्ब का बनना दिखाया गया है। वस्तु के B सिरे से मुख्य अक्ष के समान्तर चलने वाली आपतित किरण BD, दर्पण के बिन्दु समान्तर चलने वाली आपतित किरण BD, दर्पण के बिन्दु D पर गिरती है। परावर्तन के पश्चात यह किरण दर्पण के फोकस F से आती हुई प्रतीत होती है । दूसरी किरण BI वक्रता-केन्द्र की सीध में दर्पण पर आपतित होती है तथा परावर्तन के पश्चात उसी मार्ग से लौट आती है। ये दोनों परावर्तित किरणें B’ से आती हुई प्रतीत होती हैं जो कि B का प्रतिबिम्ब है। B’ से मुख्य अक्ष पर खींचा गया अभिलम्ब A’B’ वस्तु AB का सम्पूर्ण प्रतिबिम्ब है। यह प्रतिबिम्ब फोकस व ध्रुव के बीच में है तथा आभासी,सीधा व वस्तु से छोटा है ।
वस्तु की प्रत्येक स्थिति के लिए उत्तल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा, वस्तु से छोटा तथा दर्पण के पीछे; दर्पण के ध्रुव व फोकस के बीच बनता है।

प्रश्न – एक अवतल दर्पण के फोकस और ध्रुव के बीच वस्तु रखी है। किरण-आरेख खींचकर प्रतिबिम्ब का बनना प्रदर्शित कीजिए।

अथवा
अवतल दर्पण के सम्मुख इसके ध्रुव एवं फोकस के बीच रखी किसी वस्तु के प्रतिबिम्ब की स्थिति, किरण-आरेख खींचकर समझाइए।

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उत्तर : अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना, जबकि वस्तु फोकस और ध्रुव के बीच है-चित्र 8.11 में वस्तु AB; ध्रुव P तथा मुख्य फोकस F के बीच स्थित है । वस्तु के B सिरे से मुख्य अक्ष के समान्तर चलने वाली किरण BN परावर्तित होकर मुख्य फोकस F से होकर जाती है । दूसरी किरण BE दर्पण पर अभिलम्बवत् गिरती है, अतः यह परावर्तित होकर उसी मार्ग पर लौट आती है। ये दोनों परावर्तित किरणें दर्पण के पीछे बिन्दु B’ से आती हुई प्रतीत होती हैं।
अतः B’ बिन्दु B का आभासी प्रतिबिम्ब है । B’ से मुख्य अक्ष पर डाला गया लम्ब B’A’ ही वस्तु AB का सम्पूर्ण प्रतिबिम्ब है।
यह प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे, आभासी, सीधा तथा आकार में वस्तु से बड़ा बनता है।

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