देहली आवृत्ति क्या है in Hindi | कार्य फलन क्या है

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देहली आवृत्ति क्या है in Hindi | कार्य फलन क्या है

प्रश्न “कार्य फलन’ तथा ‘देहली आवृत्ति की व्याख्या कीजिए। (2018, 19) या
किसी धातु पृष्ठ के निरोधी विभव का परिवर्तन आपतित विकिरण की आवृत्ति के साथ ग्राफ में दर्शाइए। ‘देहली आवृत्ति’ की परिभाषा इससे प्लांक नियतांक ज्ञात कीजिए। (2020)

“कार्य फलन की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- कार्य फलन -किसी धातु पृष्ठ पर आपतित प्रकाश की आवृत्ति v तथा इससे उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा Eₖ के के बीच ग्राफ खींचने से प्राप्त सरल रेखा को निम्नलिखित समीकरण द्वारा निरूपित किया जा सकता है।
Eₖ = Av-B … (1)
जो सरल रेखा की व्यापक समीकरण y = mx + C के अनुरूप है। यहाँ सरल रेखा की प्रवणता अर्थात् ढलान (slope) m = A तथा Y-अक्ष अर्थात् Eₖ-अक्ष से सरल रेखा द्वारा काटा गया अन्त:खण्ड C = – B यदि हम दो भिन्न-भिन्न धातुओं a तथा bकी प्लेटें लेकर प्रयोग करें तो प्रत्येक दशा में अधिकतम गतिज ऊर्जा Eₖ तथा प्रकाश की आवृत्ति v के बीच ग्राफ सरल रेखा ही आती है। ये सरल रेखाएँ परस्पर समान्तर होती हैं अर्थात् इनके ढलान का मान A तो समान है, परन्तु v₀ एवं B के मान भिन्न-भिन्न हैं।


अत: निष्कर्ष प्राप्त होता है कि उपर्युक्त समी० (1) में A एक सार्वत्रिक नियतांक है, जिसका मान धातु की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता, परन्तु B तथा v₀ प्रयुक्त कैथोड प्लेट की धातु की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। ग्राफ से स्पष्ट है कि यदि आपतित प्रकाश की आवृत्ति v किसी भी धातु के लिए देहली आवृत्ति (v₀) के बराबर है तो Eₖ = 0, अत: उपर्युक्त समी० (1) में v = v₀ तथा Eₖ = 0 रखने पर,
0 = Av₀ -B
अथवा B = Av₀ …(2)
समीकरण (2) में v₀ चूँकि प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन के लिए न्यूनतम आवृत्ति को प्रदर्शित करता है। अत: B उस न्यूनतम ऊर्जा को प्रदर्शित करेगा जो धातु से प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन हेतु आवश्यक है।

‘देहली आवृत्ति की व्याख्या कीजिए।

देहली आवृत्ति – यदि हम Eₖ तथा v के बीच खींचे गये ग्राफ की रेखा को पीछे की ओर बढ़ायें तो यह आवृत्ति-अक्ष को एक बिन्दु Vₒ पर काटती है, तथा ऊर्जा-अक्ष पर अन्तः खण्ड (intercept) -B देती है। इससे यह पता चलता है कि किसी दी हुई धातु की प्लेट से प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करने के लिए प्लेट पर डाले जाने वाले प्रकाश की आवृत्ति vₒ से ऊँची होनी चाहिए। यदि आवृत्ति vₒ मान से नीचे है

देहली आवृत्ति क्या है in Hindi
देहली आवृत्ति क्या है in Hindi

तो धातु से कोई भी प्रकाश-इलेक्ट्रॉन नहीं निकलेगा चाहे कितना भी तीव्र तथा कितने भी समय के लिए प्रकाश क्यों न डाला जाए। इसके विपरीत, Vₒ से ऊँची आवृत्ति का मन्द प्रकाश भी इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन के लिए पर्याप्त है। प्रकाश की इस न्यूनतम आवृत्ति को, जो किसी पदार्थ से प्रकाश-इलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन कर सके, उस पदार्थ की ‘देहली आवृत्ति’ (threshold frequency) अथवा ‘संस्तब्ध -आवृत्ति’ (cut-off frequency) कहते हैं। इसे हम ग्राफ से सीधे पढ़ सकते हैं।

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Q.1- देहली आवृत्ति क्या है ?

Ans- प्रकाश की इस न्यूनतम आवृत्ति को, जो किसी पदार्थ से प्रकाश-इलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन कर सके, उस पदार्थ की ‘देहली आवृत्ति’ (threshold frequency)कहते हैं।

Q.2- देहली आवृत्ति की व्याख्या कीजिए।

Ans- देहली आवृत्ति – यदि हम Eₖ तथा v के बीच खींचे गये ग्राफ की रेखा को पीछे की ओर बढ़ायें तो यह आवृत्ति-अक्ष को एक बिन्दु Vₒ पर काटती है, तथा ऊर्जा-अक्ष पर अन्तः खण्ड (intercept) -B देती है। इससे यह पता चलता है कि किसी दी हुई धातु की प्लेट से प्रकाश-इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित करने के लिए प्लेट पर डाले जाने वाले प्रकाश की आवृत्ति vₒ से ऊँची होनी चाहिए। यदि आवृत्ति vₒ मान से नीचे है……..

Q.3- कार्य फलन की व्याख्या कीजिए।

Ans- कार्य फलन -किसी धातु पृष्ठ पर आपतित प्रकाश की आवृत्ति v तथा इससे उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा Eₖ के के बीच ग्राफ खींचने से प्राप्त सरल रेखा को निम्नलिखित समीकरण द्वारा निरूपित किया जा सकता है।

Physics Important Questions

प्रश्न 1- क्रान्तिक कोण तथा पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से क्या अभिप्राय है ? सिद्ध कीजिए कि n=1/ sinc , जहाँ संकेतों के सामान्य अर्थ हैं।

प्रश्न 2- सिद्ध कीजिए कि सघन माध्यम का अपवर्तनांक क्रान्तिक कोण की ज्या (sine) का व्युत्क्रमानुपाती होगा। (2015, 17)

प्रश्न 3 पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की व्याख्या कीजिए तथा क्रान्तिक कोण के महत्त्व को रेखांकित कीजिए। (2015)

प्रश्न 4-पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से आप क्या समझते हैं? इसकी आवश्यक शर्ते लिखिए। (2015, 18)

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