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परावर्ती दूरदर्शी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए,परावर्ती दूरदर्शी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए,परावर्ती दूरदर्शी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए,परावर्ती दूरदर्शी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए,परावर्ती दूरदर्शी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए,परावर्ती दूरदर्शी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए,

प्रश्न – किसी परावर्ती दूरदर्शी का किरण आरेख खींचकर उसमें प्रतिबिम्ब का बनना प्रदर्शित कीजिए। (2016, 17)
या
परावर्ती दूरदर्शी का किरण आरेख खींचिए तथा इसकी आवर्धन-क्षमता का सूत्र लिखिए जब प्रतिबिम्ब
(i) अनन्त पर बन रहा हो।
(ii) स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बन रहा हो।
(2011)
या
परावर्ती दूरदर्शी में प्रतिबिम्ब का बनना किरण-आरेख द्वारा समझाइए। अपवर्ती दूरदर्शी की तुलना में परावर्ती दूरदर्शी का क्या लाभ है? (2010, 11)
या


परावर्ती दूरदर्शी का किरण आरेख खींचिए तथा इसकी कार्यविधि समझाइए। किसी दूरदर्शी की विभेदन क्षमता कैसे बढ़ाई जा सकती है? (2012)
या
परावर्ती दूरदर्शी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (2017)
या
किसी परावर्ती दूरदर्शी से प्रतिबिम्ब का बनना किरण आरेख द्वारा समझाइए। अपवर्ती दूरदर्शी की अपेक्षा परावर्ती दूरदर्शी क्यों अच्छी होती है? (2017)
या
परावर्तनी दूरदर्शी का किरण आरेख खींचिए। (2020)

उत्तर– परावर्ती दूरदर्शी की रचना एवं उसके द्वारा प्रतिबिम्ब बनने का किरण आरेख दिए गए चित्र में प्रदर्शित किया गया है। इसमें अभिदृश्यक एक बड़े आकार तथा बड़ी फोकस दूरी का अवतल दर्पण M₁ होता है जो एक चौड़ी नली के एक सिरे पर लगा रहता है। नली का खुला सिरा दूर स्थित वस्तु की ओर करके रखा जाता है। नली में अवतल दर्पण के फोकस से कुछ पहले एक समतल दर्पण M₂ मुख्य अक्ष से 45° कोण पर झुका हुआ रखा जाता है। दूरदर्शी की इस चौड़ी नली के बगल में एक पतली नली लगी होती है जिसमें कैम फोकस दूरी तथा छोटी द्वारक का एक अवर्णक उत्तल लेन्स E लगा रहता है, जिसे नेत्रिका कहते हैं।

 परावर्ती दूरदर्शी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए

अवतल दर्पण M₁ दूर स्थित वस्तु AB से आने वाली समान्तर किरणों को अपने फोकस पर केन्द्रित करता है। परन्तु ये किरणे फोकस पर केन्द्रित होने से पूर्व फोकस से पहले 45° कोण पर झुके समतल दर्पण M₂ पर आपतित होती हैं। समतल दर्पण इन किरणों को परावर्तित करके AB का छोटा, वास्तविक, उल्टा प्रतिबिम्ब A₁B₁ बनाता है। नेत्रिका E द्वारा A₁B₁ का वास्तविक, सीधा तथा बड़ा प्रतिबिम्ब A₂B₂ स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी तथा अनन्त के बीच में बन जाता है। जब प्रतिबिम्ब A₁B₁ नेत्रिका के फोकस पर बन जाता है, तो अन्तिम प्रतिबिम्ब A₂B₂ अनन्त पर बनेगा।

आवर्धन क्षमता सूत्र

(i) जब प्रतिबिम्ब अनन्त पर बन रहा हो, तब M=f₀/fₑ
(ii) जब प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनता है, तब

           M =f₀/fₑ{1+(fₑ/D)}

अपवर्ती दूरदर्शी की तुलना में परावर्ती दूरदर्शी के लाभ

अपवर्ती दूरदर्शी की तुलना में परावर्ती दूरदर्शी के निम्नलिखित लाभ हैं

  1. परावर्ती दूरदर्शक में प्रकाश अवशोषण बहुत कम होता है; अत: इससे निर्मित प्रतिबिम्ब, समान द्वारक के अपवर्ती दूरदर्शक की अपेक्षा अधिक चमकीला होता है।
  2. परावर्ती दूरदर्शक से बना अन्तिम प्रतिबिम्ब वर्ण-विपथन दोष से पूर्णत: मुक्त होता है।
  3. इसमें परवलयाकार दर्पणों के प्रयोग से गोलीय विपथन दोष भी स्वत: दूर हो जाता है जिससे प्रतिबिम्ब टेढ़े दिखायी नहीं देते।
  4. दूरदर्शी से दूर-स्थित वस्तु का चमकीला प्रतिबिम्ब बनाने के लिए उसके अभिदृश्यक का द्वारक बड़ा (large) होना आवश्यक है। तकनीकी दृष्टि से बड़े द्वारक के लेन्स को ढालने (casting) की क्रिया में उसके पदार्थ में विकृति आ जाती है, क्योंकि बड़े आकार के गर्म काँच को एकसमान (uniformly) ठण्डा करना कठिन होता है। फलस्वरूप इनसे निर्मित प्रतिबिम्ब भी विकृत हो जाते हैं। चूँकि दर्पण से परावर्तन द्वारा प्रतिबिम्ब निर्मित होते हैं, प्रकाश की किरण केवल दर्पण के पृष्ठ को स्पर्श करती है, उसके पदार्थ में होकर नहीं गुजरती है। अतः दर्पण के पदार्थ में कोई विकृति होने पर उसका प्रतिबिम्ब पर प्रभाव नहीं पड़ता।
  5. दूरदर्शी की विभेदन क्षमता = d/ 1.22λ अत: अभिदृश्यक का द्वारक d बढ़ाकर दूरदर्शी की विभेदन क्षमता बढ़ायी जा सकती है।
  6. परावर्ती दूरदर्शी में परवलयाकार दर्पण के उपयोग से प्रतिबिम्ब में गोलीय विपथन के दोष को दूर किया जा सकता है।

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परावर्ती दूरदर्शी की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए

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