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प्रकाशीय तंतु क्या है इसकी संरचना एवं उपयोग

प्रश्न3. प्रकाशिक तन्तु क्या होते हैं? इनकी रचना, कार्य सिद्धान्त तथा अनुप्रयोग लिखिए। इसमें किस घटना का उपयोग होता है? (2015)

प्रकाशिक तन्तु क्या होते हैं?

उत्तर- प्रकाशिक तन्तु-प्रकाशिक तन्तु प्रकाश के पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की घटना पर आधारित एक ऐसी युक्ति है जिसमें किसी प्रकाश सिग्नल को प्रकाश के ही रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान तक तीव्र गति से बिना ऊर्जा-हास के प्रेक्षित किया जा सकता है।

इनकी रचना

रचना-यह उच्च कोटि के काँच (क्वार्ट्स अपवर्तनांक 1.7) के अत्यधिक लम्बे तथा पतले हजारों तन्तुओं (fibers) से मिलकर बना होता है। प्रत्येक रेशे (तन्तु) की मोटाई लगभग माइक्रो मीटर (10⁻4 मी) कोटि की होती है। तन्तु (क्वार्ट्स के रेशे के चारों ओर अपेक्षाकृत कम अपवर्तनांक (n = 1.5) वाले पदार्थ की पतली तह लेपित कर दी जाती है। पाइप के भीतरी भाग को क्रोड (core) तथा लेपित भाग को अधिपट्टन (cladding) कहते हैं।

प्रकाशीय तंतु क्या है इसकी संरचना एवं उपयोग

इसके चारों ओर सुरक्षा के लिए प्लास्टिक का एक आवरण होता है। क्रोड के पदार्थ का अपवर्तनांक अधिपट्टन के अपवर्तनांक की तुलना में अधिक होता है। इस प्रकार के पाइपों की बड़ी संख्या के समूह को एक पाइप में डाल दिया जाता है जिसे ‘प्रकाश पाइप’ (light pipe) कहते हैं तथा इसे प्रकाश सिग्नलों के प्रेक्षण में प्रयुक्त किया जाता है।

इनकी कार्य सिद्धान्त

कार्य सिद्धान्त – जब प्रकाश किरण तन्तु के एक सिरे पर अल्प कोण बनाती हुई आपतित होती है तो यह इसके अन्दर अपवर्तित होकर तन्तु तथा तन्तु के ऊपर किये गये लेप के अन्तरापृष्ठ पर क्रान्तिक कोण से बड़े कोण पर आपतित होती है। अत: यह किरण यहाँ से पूर्ण परावर्तित होकर इसके सम्मुख वाले अन्तरापृष्ठ पर टकराती है।

यहाँ पर यह पुनः क्रान्तिक कोण से बड़े कोण पर आपतित होती है। इसलिए यह पुनः पूर्ण आन्तरिक परावर्तित हो जाती है। इस प्रकार यह किरण बार-बार पूर्ण आन्तरिक परावर्तित होती हुई प्रकाशिक तन्तु के दूसरे सिरे पर पहुँच जाती है। तन्तु के इस सिरे पर यह किरण वायु में अपवर्तित होकर अभिलम्ब से दूर हटती हुई तीव्रता के कम हुए बिना बाहर निकल जाती है।

अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं

1- संचार प्रणाली में प्रकाशिक तन्तु से संदेशों को मॉडुलन (modulation) द्वारा एक साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है। संदेशों की अधिक संख्या उच्च आवृत्ति वाली वैद्युत-चुम्बकीय तरंगों द्वारा मॉडुलित करके एक साथ संचारित की जा सकती है। प्रकाश अति उच्च आवृत्ति वाली वैद्युत-चुम्बकीय तरंग है। इनका संचरण सुचालक तार के स्थान पर प्रकाशिक तन्तु द्वारा किया जा सकता है। आधुनिक युग में प्रकाशिक तन्तुओं का उपयोग टेलीफोन व संचार लाइनों के रूप में हो रहा है।

2- प्रकाशीय तन्तु विद्युत संकेतों को एक स्थान से दूसरे स्थान तर्क संचरित करने में काम आते हैं। ये विद्युत संकेत परांतरित्र (transducer) द्वारा प्रकाश में परिवर्तित कर दिये जाते हैं। अब इन प्रकाशीय संकेतों को प्रकाश तन्तुओं द्वारा दूरस्थ स्थानों तक भेज दिया जाता है।

3- प्रकाशीय तन्तुओं द्वारा वस्तुओं के प्रतिबिम्बों को दूरस्थ स्थानों पर भेजा जा सकता है।

4- इनका प्रयोग सजावट करने वाले लैम्पों में किया जाता है। फव्वारों में जल की धारा को प्रकाशित करने में इनका प्रयोग किया जाता है।

Physics Important Questions

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