बल क्या है? | बल कितने प्रकार के होते हैं,मात्रक

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प्रश्न बल क्या है ? बल कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक की परिभाषा देते हुए समझाइए। बल का मात्रक क्या हैं? इसका त्वरण से क्या सम्बन्ध है?

बल क्या है

प्रश्न- बल क्या है?

बल की परिभाषाबल वह बाह्य कारक है जो किसी वस्तु की विराम अथवा एकसमान गति की अवस्था ” में परिवर्तन करता है अथवा परिवर्तन करने का प्रयत्न करता है।

” वास्तव में, किसी वस्तु में गति उत्पन्न करने के लिए किसी बाह्य प्रभाव की आवश्यकता होती है, जिसे बल कहते हैं। जब हम जमीन पर रखी हुई किसी वस्तु को उठाते हैं अथवा किसी गाड़ी को धक्का देते हैं अथवा किसी रस्सी से कार को खींचते हैं, तो इन सभी क्रियाओं में बल लगाया जाता है ।

  • इसे ‘F’ से प्रदर्शित करते हैं।
  • बल एक सदिश राशि है।
  • बल का मात्रक न्यूटन हैं

प्रश्न- बल कितने प्रकार के होते हैं ? प्रत्येक को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : बल के प्रकार बल दो प्रकार के होते हैं
(i) सन्तुलित बल,
(ii) असन्तुलित बल ।

सन्तुलित बल

“जब किसी वस्तु पर एक साथ कई बल कार्य कर रहे हों और उनका परिणामी बल शून्य हो,तो उन बलों को सन्तुलित बल कहते हैं।”

सन्तुलित बलों की अवस्था में यदि कोई वस्तु स्थिर है, तो स्थिर रहेगी तथा यदि एकसमान गति कर रही है, तो वह उसी प्रकार गति करती रहेगी,जैसे कि वस्तु पर कोई बल कार्य ही न कर रहा हो। इस प्रकार सन्तुलित बलों के प्रभाव से वस्तु की स्थिति में परिवर्तन नहीं होता है।

फिर भी, सन्तुलित बलों से वस्तु की आकृति बदल जाती है। जैसे—यदि रबड़ की एक गेंद को हथेलियों के बीच रखकर बराबर व विपरीत बल लगाएँ तो गेंद की आकृति बदल जाती है। यह गेंद गोल न रहकर चपटी-सी हो जाती है।

उदाहरण : रस्साकशी के खेल में जब दोनों टीम रस्से को बराबर बल से खींचती हैं तब परिणामी बल शून्य होगा। अतः रस्सा तथा दोनों टीमें अपने स्थान पर स्थिर बने रहते हैं । इस दशा में दोनों टीमों द्वारा रस्से पर लगाया गया बल सन्तुलित है।

असन्तुलित बल

“जब किसी वस्तु पर लगे अनेक बलों का परिणामी बल शून्य न हो, तो उन बलों को असन्तुलित बल कहते हैं।” यह बल,गति की दिशा तथा अवस्था (चाल) में परिवर्तन करता है।

उदाहरण : रस्साकशी में यदि एक टीम दूसरी टीम से अधिक शक्तिशाली है, तो वह रस्से तथा कमजोर टीम को अपनी ओर खींच लेती है । इस दशा में रस्से पर लगने वाला बल असन्तुलित बल है।

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बल के प्रभाव

बल के तीन प्रभाव हो सकते हैं

(i) बल वस्तु की चाल बदल सकता है । यह रुकी हुई वस्तु को गति में ला सकता है अथवा गतिशील वस्तु को रोक सकता है।
(ii) बल वस्तु की गति की दिशा बदल सकता है।
(iii) बल द्वारा वस्तु का आकार बदल सकता है ।

बल तथा त्वरण में सम्बन्ध

किसी वस्तु पर आरोपित बल (F), वस्तु के द्रव्यमान (m) तथा वस्तु में बल की दिशा में उत्पन्न त्वरण (a) के अनुक्रमानुपाती होता है, अर्थात् के F∝ a तथा F∝m
अथवा F∝ ma
अथवा F=Kma ( जहाँ K एक नियतांक है।)
इस समीकरण में यदि F = 1, m = 1 तथा a = 1 रखें, तो K = 1 होगा।
अतः F = ma
अथवा बल = द्रव्यमान× त्वरण

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