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बायो-सेवर्ट नियम

प्रश्न 5. बायो-सेवर्ट नियम की सहायता से कुण्डली के अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक प्राप्त कीजिए।

 उत्तर- माना R त्रिज्या की वृत्ताकार कुण्डली में धारा l प्रवाहित हो रही है। कुण्डली का तल कागज के लम्बवत् है तथा कुण्डली के केन्द्र 0 से x दूरी पर स्थित एक बिन्दु है जिस पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्ञात करना है। माना कुण्डली के बिन्दु A पर dl लम्बाई का एक सूक्ष्म खण्ड है, तो बायो-सेवर्ट के नियमानुसार, इस खण्ड के कारण बिन्दु P पर चुम्बकीय क्षेत्र

 dB=μ₀ldlsin90°/4πr² …………(1)

 क्योंकि धाराखण्ड ldl तथा r के बीच कोण 90° है। 

dB=μ₀ldl/4πr² …………(2)

इतनी ही लम्बाई का dl एक अन्य धाराखण्ड di कुण्डली के ठीक नीचे लेते हैं, जिसकी दिशा कागज के तल के लम्बवत् भीतर नीचे की ओर है। इस धाराखण्ड के कारण चुम्बकीय क्षेत्र dB का परिमाण तो ही है परन्तु दिशा चित्र के अनुसार है। कुण्डली के अक्ष के लम्बवत् dB और dB’ के घटक परिमाण में समान और विपरीत दिशा में हैं। अत: वे एक-दूसरे को निरस्त करते हैं तथा कुण्डली के अक्ष के अनुदिश dB और dB’ के घटक समान दिशा में हैं, अतः वे जुड़ जाते हैं। इसी प्रकार, समस्त कुण्डली को धाराखण्ड में विभक्त माना जा सकता है। अतः बिन्दु P पर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र B इसके अक्ष के अनुदिश होगा।

 बायो-सेवर्ट नियम

∴  बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण,

B = ∫dBsinθ

 समी (2) से मान रखने पर,

B=∫μ₀ldlsin90°/4πr²

=μ₀l/4πr²∫dlsinθ

=μ₀l/4πr²∫dlR/r (चित्र से,sinθ=R/r)

= Rμ₀l/4πr²r∫dl

 =2πR.Rμ₀l/4πr²r    [∫dl = 2πR(परिधि)]

 =R²μ₀l/2r³   ………..(3)

ΔOAP में, पाइथागोरस प्रमेय से,

r²=R²+x²

r=√(R²+x²)

r=(R²+x²)1/2

r³=(R²+x²)³/2   ………….(4)

 समी (4) का मान समी (3) में रखने पर, 

B=R²μ₀l/2(R²+x²)³/2 

 यदि कुण्डली में N फेरे हों, तो प्रत्येक फेरा उतना ही चुम्बकीय क्षेत्र B उत्पन्न करेगा। इसलिए परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र, 

B=μ₀NlR²/2(R²+x²)³/2 

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