रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की व्याख्या कीजिए

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Question.1 – रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की व्याख्या कीजिए, तथा इसकी कमियों का उल्लेख कीजिए। (2015)
या
रदरफोर्ड के α-कण प्रकीर्णन के प्रयोग से परमाणु की संरचना के लिए क्या सूचनाएँ प्राप्त हुईं? (2018)

या
α -कणों के प्रकीर्णन या प्रयोग के आधार पर रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल लिखिए।इस मॉडल की कमियाँ भी बताइए। (2019, 20)

Q.1- रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की व्याख्या कीजिए

उत्तर– परमाणु की सही संरचना जानने के लिये रदरफोर्ड ने सन् 1911 में एक महत्त्वपूर्ण प्रयोग किया जिसे चित्र (a) में दिखाया गया है। इसमें रेडियोऐक्टिव तत्त्व पोलोनियम (polonium) से उच्च गतिज ऊर्जा से निकलने वाली α-कणों के एक बारीक किरण पुंज को एक बहुत पतले स्वर्ण-पत्र पर गिराया गया। पूरे प्रबन्ध को निर्वात् में रखा गया जिससे कि α-कणों की वायु के कणों से कोई टक्कर न हो। रदरफोर्ड ने यह देखा कि स्वर्ण-पत्र में से गुजरते हुए ये कण विभिन्न दिशाओं में विक्षेपित हो जाते हैं। α-कणों के अपने मार्ग से विक्षेपित होने की इस घटना को ‘प्रकीर्णन’ कहते हैं। स्वर्ण-पत्र से विभिन्न दिशाओं में निकलने वाले कणों को एक प्रस्फुर गणित्र (scintillation counter) द्वारा गिन सकते हैं

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की व्याख्या कीजिए

रदरफोर्ड ने इस प्रयोग से निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण तथ्य प्राप्त किये

1- अधिकांश α-कण स्वर्ण-पत्र के आर-पार बिना प्रभावित हुए सीधे ही निकल जाते हैं। इससे रदरफोर्ड ने यह निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग भीतर से खोखला होता है (यह किसी भी दशा में ठोस नहीं हो सकता जैसा कि टॉमसन ने माना था)।

2-कुछ α-कण छोटे-छोटे कोण बनाते हुए विक्षेपित हो जाते हैं तथा इनका कोणीय वितरण सुनिश्चित होता है। अब, चूँकि α-कण धनावेशित हैं, अतः इन्हें विक्षेपित करने वाला परमाणु भी धनावेशित होना चाहिए। इस आधार पर रदरफोर्ड ने यह माना कि परमाणु का सम्पूर्ण धन-आवेश एक सूक्ष्म स्थान में केन्द्रित रहता है (यह परमाणु में समान रूप से वितरित नहीं हो सकता जैसा कि टॉमसन ने माना था)।

3- कुछ α-कण ऐसे भी हैं जो अपने प्रारम्भिक मार्ग से 90° से भी अधिक कोण पर प्रकीर्णित होकर वापस लौट आते हैं [चित्र (b)]। इससे यह पता चलता है कि जब धनावेशित α-कण स्वर्ण-पत्र के परमाणुओं में से गुजरते हैं, तो किसी-किसी कण पर इतना अधिक प्रतिकर्षण-बल लगता है कि वह तीव्रगामी α-कण को वापस लौटा देता है।

इस आधार पर रदरफोर्ड ने यह माना कि धन-आवेश परमाणु के भीतर एक अत्यन्त सूक्ष्म स्थान में संकेन्द्रित रहता है। इस स्थान को ‘नाभिक’ (nucleus) कहते हैं। गणना करने पर नाभिक की त्रिज्या 10⁻¹⁵ मीटर की कोटि की पायी जाती है, जबकि परमाणु की त्रिज्या 10⁻¹⁰ मीटर की कोटि की है।

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की व्याख्या कीजिए

अत: नाभिक की त्रिज्या परमाणु की त्रिज्या के दस हजारवें भाग के बराबर होती है। परमाणु के शेष खाली भाग में केवल इलेक्ट्रॉन होते हैं। α-कण नाभिक के जितना पास आयेगा, उस पर उतना ही अधिक प्रतिकर्षण-बल लगेगा और वह उतना ही अधिक विक्षेपित होगा। यदि परमाणु के आकार की तुलना में नाभिक अत्यन्त छोटा है, तो किसी α-कण की नाभिक के समीप पहुँचने की सम्भावना भी बहुत कम होगी।

अतः अधिक कोणों पर प्रकीर्णित होने वाले α-कणों की संख्या कम होगी। प्रयोग से इस तथ्य की पुष्टि होती है। गणना द्वारा देखा गया है कि लगभग 20,000 में से केवल 1 ही α-कण ऐसा है जो कि 90° से अधिक कोण पर प्रकीर्णित होता है। इस प्रकार, इस प्रयोग द्वारा परमाणु के धन-आवेश के विस्तार के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।

4- कणों के प्रकीर्णन के प्रयोग द्वारा कूलॉम नियम की सत्यता के सम्बन्ध में भी जानकारी प्राप्त हुई। रदरफोर्ड ने यह माना था कि जब कोई व-कण स्वर्ण-पत्र के परमाणुओं में से गुजरता है, तो उस पर नाभिक द्वारा लगाया गया प्रतिकर्षण-बल कूलॉम के नियमानुसार (कण की नाभिक से दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती) होता है। जो कण परमाणु से गुजरते समय नाभिक से दूर रहता है उस पर लगने वाला प्रतिकर्षण-बल इतना कम होता है कि वह बिना किसी विशेष विक्षेप के अपने मार्ग पर चला जाता है।

परन्तु जो कण नाभिक के जितना समीप से गुजरता है उस पर उतना ही अधिक प्रतिकर्षण-बल लगता है तथा वह उतने ही बड़े कोण से प्रकीर्णित होता है। रदरफोर्ड ने, कूलॉम के नियम के आधार पर विभिन्न कोण पर प्रकीर्णित होने वाले कणों का परिकलन किया और यह पाया कि नाभिक द्वारा α-कणों का प्रकीर्णन कूलॉम नियम के अनुसार होता है। दूसरे शब्दों में, कूलॉम का नियम परमाणवीय दूरियों के लिये भी लागू रहता है।

5- रदरफोर्ड ने अपने प्रयोग द्वारा विभिन्न धातुओं के नाभिकों के धन-आवेशों के सम्बन्ध में भी जानकारी प्राप्त की। उसने α-कणों को विभिन्न धातुओं (जैसे—सोना, चाँदी, प्लैटिनम इत्यादि) के पतले पत्रों पर गिराकर एक निश्चित दिशा में प्रकीर्णित होने वाले कणों को गिना और देखा कि यह संख्या विभिन्न धातुओं के पत्रों के लिए भिन्न-भिन्न आती है। इससे यह पता चला कि विभिन्न धातुओं के नाभिकों में धन-आवेश का परिमाण भिन्न-भिन्न होता है

नाभिक में धन-आवेश जितना अधिक होगा, वह α-कण को उतने ही अधिक बल से प्रतिकर्षित करेगा तथा x-कण अपने मार्ग से उतना ही अधिक प्रकीर्णित होगा। रदरफोर्ड ने गणना द्वारा यह दिखाया कि एक दिये हुए धातु-पत्र द्वारा एक निश्चित कोण-परिसर (range of angles) के भीतर प्रकीर्णित होने वाले α-कणों की संख्या उस धातु के नाभिक के धन-आवेश की मात्रा के अनुक्रमानुपाती है।

इस आधार पर सन् 1920 में चैडविक ने अनेक धातुओं के नाभिकों के धन-आवेशों को ज्ञात किया तथा यह पाया कि किसी धातु के नाभिक के धन-आवेश का परिमाण Ze होता है, जहाँ e इलेक्ट्रॉन के (ऋण) आवेश का मान है तथा Z उस धातु के लिये नियतांक है। Z को ‘परमाणु-क्रमांक’ (atomic number) कहते हैं।

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल में कमियाँ–रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल में निम्न दो कमियाँ पायी गयीं


( i) परमाणु के स्थायित्व के सम्बन्ध में – नाभिक के चारों ओर घूमते इलेक्ट्रॉन में अभिकेन्द्र त्वरण होता है। विद्युत गतिविज्ञान (electrodynamics) के अनुसार, त्वरित आवेशित कण ऊर्जा (विद्युत-चुम्बकीय तरंगें) उत्सर्जित करता है। अतः नाभिक के चारों ओर विभिन्न कक्षाओं में घूमते इलेक्ट्रॉनों से विद्युतचुम्बकीय तरंगें लगातार उत्सर्जित होनी चाहिए। इस प्रकार, इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा का ह्रास होने के कारण उनके वृत्तीय पथ की त्रिज्या लगातार कम होती जानी चाहिए और अन्त में वे नाभिक में गिर जाने चाहिए। इस प्रकार परमाणु स्थायी नहीं रह सकता।

(ii) रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या के सम्बन्ध में – मॉडल में इलेक्ट्रॉनों के वृत्तीय पथ की त्रिज्या के लगातार बदलते रहने से उनके घूमने की आवृत्ति भी बदलती रहेगी। इसके फलस्वरूप इलेक्ट्रॉन सभी आवृत्तियों की विद्युत-चुम्बकीय तरंगें उत्सर्जित करेंगे, अर्थात् इन तरंगों का स्पेक्ट्रम संतत (continuous) होगा।

परन्तु वास्तव में परमाणुओं के स्पेक्ट्रम संतत न होकर, रेखीय होते हैं अर्थात् उनमें बहुत-सी बारीक रेखाएँ होती हैं तथा प्रत्येक स्पेक्ट्रमी रेखा की एक निश्चित आवृत्ति होती है।

अत: परमाणु से केवल कुछ निश्चित आवृत्ति की ही तरंगें उत्सर्जित होनी चाहिए, सभी आवृत्तियों की नहीं। इस प्रकार, रदरफोर्ड मॉडल रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या करने में असक्षम रहा। इन कमियों को नील बोर ने क्वाण्टम सिद्धान्त के आधार पर दूर किया।

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Some Important Physics Questions

प्रश्न 1- बन्धन ऊर्जा वक्र बनाइए तथा इसके आधार पर निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए

प्रश्न 2- समस्थानिक तथा समभारिक का अर्थ दो-दो उदाहरण देकर समझाइए। (2012, 14, 17, 19, 20)

प्रश्न 3- विभिन्न नाभिकों की बन्धन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन संख्या (A) के साथ परिवर्तन, ग्राफ द्वारा निरूपित कीजिए। कारण बताते हुए समझाइए कि क्यों हल्के नाभिकों का सामान्यतः नाभिकीय संलयन होता है? (2014)

प्रश्न 4- हाइड्रोजन परमाणु के लिए ऊर्जा-स्तर आरेख खींचिए तथा स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लाइमन, बॉमर तथा पाश्चन श्रेणियों की उत्पत्ति समझाइए। इन श्रेणियों में से कौन-सी स्पेक्ट्रम के दृश्य भाग में के मिलती है? (2015, 17, 18)

प्रश्न 5- हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की विभिन्न श्रेणियों के लिए तरंगदैर्घ्य का सूत्र लिखिए। हाइड्रोजन परमाणु की लाइमन श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए। इस श्रेणी की सीमा तरंगदैर्घ्य भी ज्ञात कीजिए| R=1.097×10⁷ मी⁻¹ (2012, 18)

प्रश्न 6- हाइड्रोजन परमाणु की nवीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा Eₙ= -13.6/n² इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) सूत्र से दी जाती है। इसके आधार पर
(i) n=1,2,3,4,5,6 तथा ० के लिए विभिन्न ऊर्जा स्तरों की खींचिए।
(ii) विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक संक्रमणों द्वारा हाइड्रोजन परमाणु के उत्सर्जन स्पेक्ट्रम की लाइमन तथा बॉमर श्रेणियों को प्रदर्शित कीजिए।(2015, 17)

प्रश्न 7- हाइड्रोजन उत्सर्जन स्पेक्ट्रम में लाइमन श्रेणी का बनना, ऊर्जा स्तर आरेख के आधार पर समझाइए। लाइमन श्रेणी की प्रथम रेखा की तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए। (2015)

प्रश्न 8- हाइड्रोजन परमाणु में ऊर्जा स्तरों की Eₙ= -13.6/n² ev से व्यक्त किया जाता है। ऊर्जा-स्तर आरेख खींचकर Hα तथा Gγ संक्रमणों को दर्शाइए तथा उनकी तरंगदैर्घ्य भी ज्ञात कीजिए। (2018)

प्रश्न 9- हाइड्रोजन परमाणु के वर्णक्रम में प्राप्त उस श्रेणी का नाम लिखिए जो अवरक्त क्षेत्र में प्राप्त होती है। इस श्रेणी की लाइनों के तरंगदैर्घ्य के लिए सामान्य सूत्र लिखिए। । (2018)

प्रश्न 10- हाइड्रोजन परमाणु के स्पेक्ट्रम में बामर श्रेणी की रेखाओं के तरंगदैर्घ्य के लिए सूत्र लिखिए। इस श्रेणी के लिए अधिकतम तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए। (2018)

प्रश्न 11- बोर मॉडल के आधार पर हाइड्रोजन परमाणु का ऊर्जा स्तर आरेख खींचिए और स्पेक्ट्रमी रेखाओं के लाइमन, बामर एवं पाश्चन श्रेणियों की उत्पत्ति समझाइए। बामर श्रेणी की प्रथम रेखा का तरंगदैर्घ्य भी परिकलित कीजिए। (2018, 20)

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