समस्थानिक तथा समभारिक का अर्थ

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प्रश्न 1- समस्थानिक तथा समभारिक का अर्थ दो-दो उदाहरण देकर समझाइए। (2012, 14, 17, 19, 20)

 समस्थानिक तथा समभारिक का अर्थ

उत्तर- समस्थानिक अथवा समप्रोटॉनिक (Isotopes or Isoprotons)—किसी एक ही तत्त्व के ऐसे परमाणु जिनके नाभिकों में प्रोटॉनों की संख्या समान होती है, परन्तु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न-भिन्न होती है, उस तत्त्व के ‘समस्थानिक’ या ‘समप्रोटॉनिक’ कहलाते हैं। इस प्रकार किसी तत्त्व के विभिन्न समस्थानिकों के परमाणु क्रमांक (Z) समान होते हैं, परन्तु द्रव्यमान संख्या (A) भिन्न-भिन्न होती है। क्योंकि इनके परमाणु-क्रमांक समान हैं, अत: आवर्त सारणी में इनका स्थान समान होता है। इसी कारण इन्हें समस्थानिक भी कहते हैं।
उदाहरणार्थ– हाइड्रोजन : ₁H¹, ₁H², ₁H³
ऑक्सीजन : ₈O¹⁶ , ₈O¹⁷,₈O¹⁸

समभारिक (Isobaric)—ऐसे नाभिकों को जिनमें न्यूक्लिऑनों की कुल संख्या समान होती है, परन्तु प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न-भिन्न होती है, ‘समभारिक’ कहते हैं। इन नाभिकों का परमाणु क्रमांक (Z) भिन्न-भिन्न तथा द्रव्यमान संख्या (A) समान होती है। अत: आवर्त सारणी में इनका स्थान भिन्न-भिन्न होता है और इनके रासायनिक गुण भी एक जैसे नहीं होते।
उदाहरणार्थ – ₁H³ तथा ₂He³, ₇N¹⁴ तथा ₆C¹⁴, ₈O¹⁷ तथा ₉

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