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हाइगेन्स का द्वितीयक तरंग सिद्धांत

प्रश्न -हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त की सहायता से तरंगों के अपवर्तन की व्याख्या कीजिए तथा स्नैल के नियम का निगमन कीजिए। (2011)
या
हाइगेन्स तरंग सिद्धान्त के आधार पर प्रकाश तरंगों के अपवर्तन की व्याख्या कीजिए। (2013, 18, 19, 20)
या
हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं के सिद्धान्त के आधार पर प्रकाश तरंगों के अपवर्तन के नियम की व्याख्या कीजिए।(2014, 18, 19)

उत्तर- माध्यम घटना तरंग की जब कोई तरंग एक समांग माध्यम में चलकर किसी दूसरे समांग में प्रवेश करती है तो वह अपने मार्ग से विचलित हो जाती है। इस को अपवर्तन कहते हैं। इसमें तरंग की आवृत्ति ‘नहीं’ बदलती परन्तु चाल एवं तरंगदैर्घ्य बदल जाती हैं।

Some Important Physics Questions

हाइगेन्स का द्वितीयक तरंग सिद्धांत

माना ZZ’ समतल पृष्ठ है जो दो माध्यमों को अलग करता है। माना इन माध्यमों में किसी तरंग की चालें क्रमश: v₁ व v₂ हैं। माना पहले माध्यम में एक समतल तरंगाग्र AB तिरछा आपतित होता है और पहले माध्यम में पृष्ठ ZZ’ के बिन्दु A को t=0समय पर स्पर्श करता है तथा तरंगाग्र के बिन्दु B को A’ तक पहुँचने में t समय लगता है, तब BA’ = v₁t तरंगाग्र AB के आगे बढ़ने पर वह सीमा पृष्ठ के Aव A’ के बीच के बिन्दुओं से टकराता है। इन बिन्दुओं से हाइगेन्स की गोलीय तरंगिकाएँ निकलने लगती हैं जो पहले माध्यम में v₁ चाल से और दूसरे माध्यम में v₂ चाल से चलने लगती हैं।

सर्वप्रथम A से चलने वाली द्वितीयक तरंगिका t समय में दूसरे माध्यम में AB’ (=v₂t) दूरी तय करती है और इतने ही समय में बिन्दु B, पहले माध्यम में BA’ (=v₁t) दूरी चलकर A’ पर पहुँच जाता है जहाँ से अब द्वितीयक तरंगिका चलना प्रारम्भ करती है। इस प्रकार-
AB’ (=v₂t) BA’ (=v₁t)

बिन्दु A को केन्द्र मानकर AB’ त्रिज्या का एक चाप खींचते हैं तथा A’ से इस चाप पर स्पर्श रेखा A’B’ खींचते हैं। जैसे-जैसे आपतित तरंगाग्र AB आगे बढ़ता जाता है, A व A’ के बीच सभी बिन्दुओं से एक के बाद एक चलने वाली द्वितीयक तरंगिकाएँ एक साथ A’B’ को स्पर्श करेंगी; अर्थात् A’B’ सभी द्वितीयक तरंगिकाएँ को स्पर्श करेगा। अत: A’B’ ‘अपवर्तित’ तरंगाग्र होगा। माना कि आपतित तरंगाग्र AB तथा अपवर्तित तरंगाग्र A’B’ अपवर्तक तल ZZ’ के साथ क्रमशः कोण i तथा r बनाते हैं। अब समकोण त्रिभुज ABA’ में

sini = BAʼ/AA’ =v₁t/AA’ …(1).

इसी प्रकार, समकोण त्रिभुज AB’A’ में

sin r = AB’/AA’ = v₂t/AA’ …(2)

समी० (1) को समी० (2) से भाग करने पर,

sini/ sinr = v₁/v₂ =नियतांक

यही अपवर्तन का प्रथम नियम है। इसको ही स्नैल का नियम कहते हैं। चित्र से स्पष्ट है कि आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब एक ही तल में हैं (यही अपवर्तन का दूसरा नियम है।) स्नैल के नियम में प्रयुक्त नियतांक को दूसरे माध्यम का (पहले माध्यम के सापेक्ष) अपवर्तनांक कहते हैं तथा इसे ‘₁n₂’ से प्रदर्शित करते हैं।
अतः
₁n₂ = sini /sinr =v₁/v₂

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Important Question

प्रश्न- तरंगाग्र किसे कहते हैं?| हाइगेन्स के द्वितीयक तरंगिकाओं का सिद्धान्त लिखिए। (2011, 12, 13, 18)

प्रश्न- हाइगेन्स के तरंग संचरण सम्बन्धी सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।(2017, 19)

प्रश्न- अनुगमन वेग क्या है ?