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Conditions for interference

conditions for interference

प्रश्न- तरंगों के संपोषी तथा विनाशी व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्ते बताइए। (2010, 13, 18)

उत्तर- संपोषी व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्ते परिणामी तीव्रता के सूत्र l= l₁+l₂+2√(l₁l₂)cosΦ , से
स्पष्ट है कि किसी बिन्दु पर संपोषी व्यतिकरण अर्थात् अधिकतम तीव्रता के लिए,
cosΦ=+1 अर्थात् Φ= 0,2π, 4π
अथवा Φ = 2mπ (जहाँ m= 0,1,2,…)
परन्तु कलान्तर Φ= 2π/λ पथान्तर (Δx) (जहाँ λ= तरंगदैर्घ्य)
:. दोनों तरंगों के बीच पथान्तर Δ x =λΦ/2π=2mπλ/2π
Δx=mλ (जहाँ m=0,1,2,3,…)
Δx = 0,λ,2λ, 3λ…..

अतः संपोषी व्यतिकरण के लिए आवश्यक है, कि
(i) दोनों तरंगों के बीच कलान्तर शून्य अथवा L का सम गुणक होना चाहिए, अर्थात् तरंगें एक ही कला में मिलनी चाहिए।
(ii) दोनों तरंगों के बीच पथान्तर शून्य अथवा तरंगदैर्घ्य 2 का पूर्ण गुणक होना चाहिए।

विनाशी व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्ते
परिणामी तीव्रता के सूत्र l= l₁+l₂+2√(l₁l₂)cosΦ से,
स्पष्ट है कि किसी बिन्दु पर विनाशी व्यतिकरण अर्थात् न्यूनतम तीव्रता के लिए
cosΦ =-1 अर्थात् Φ= π, 3π,5π
अथवा Φ = (2m-1)π (जहाँ m=1,2,3,…)
परन्तु कलान्तर Φ= 2π/λ पथान्तर (Δx) (जहाँ λ= तरंगदैर्घ्य)
:. पथान्तर Δ x=λΦ/2π=(2m-1)πλ/2π
Δx=(2m-1)λ/2 (जहाँ m=1,2,3,…)
Δx = λ/2,3λ/2, 5λ/2………

अतः विनाशी व्यतिकरण के लिए आवश्यक है, कि
(i) दोनों तरंगों के बीच कलान्तर 1 का विषम गुणक होना चाहिए, अर्थात् तरंगें विपरीत कला में मिलनी चाहिए।
(ii) दोनों तरंगों के बीच पथान्तर अर्द्ध-तरंगदैर्घ्य (λ/2) का विषम गुणक होना चाहिए।

मेलस का नियम क्या है?

गति क्या है ?

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