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Einstien’s Photoelectric Equation

प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन सम्बन्धी आइन्स्टीन की समीकरण (1/2)mv²max =h(v-v₀) की स्थापना कीजिए। (2010, 14, 16, 17, 18, 19)
या
क्वाण्टम मॉडल के आधार पर प्रकाश-वैद्युत प्रभाव की व्याख्या कीजिए तथा आइन्स्टीन के प्रकाश-वैद्युत समीकरण को व्युत्पादित कीजिए। (2011, 15, 18)
या
प्रकाश-वैद्युत प्रभाव से आप क्या समझते हैं? आइन्स्टीन के प्रकाश-वैद्युत समीकरण को व्युत्पन्न कीजिए। (2012)
या
आइन्सटीन द्वारा प्रकाश वैद्युत उत्सर्जन की घटना की व्याख्या कीजिए तथा प्रकाश-वैद्युत समीकरण व्युत्पादित कीजिए। (2013)
या
प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन सम्बन्धी आइन्स्टीन की समीकरण को व्युत्पन्न कीजिए।(2013, 17)
या
प्रकाश वैद्युत उत्सर्जन में उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम ऊर्जा का समीकरण व्युत्पन्न कीजिए। (2015, 17, 20)
या
प्रकाश-विद्युत प्रभाव से क्या समझते हैं? आइंस्टीन का प्रकाशविद्युत समीकरण निगमित कीजिए। (2019)

Einstien's Photoelectric Equation

प्रकाश-वैद्युत प्रभाव से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- प्रकाश-वैद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect) — जब किसी धातु पर उच्च आवृत्ति का प्रकाश (जैसे – पराबैंगनी विकिरण) डाला जाता है तो उसकी सतह से इलेक्ट्रॉन निकलने लगते हैं। “धातुओं पर प्रकाश के आपतित होने से उनकी सतह से इलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन (emission) की घटना को प्रकाश-वैद्युत प्रभाव (photoelectric effect) कहते हैं।”

प्रकाश-वैद्युत प्रभाव की घटना में उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को प्रकाश-इलेक्ट्रॉन अथवा फोटो- इलेक्ट्रॉन (photoelectron) तथा इन इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह के कारण उत्पन्न वैद्युत धारा को प्रकाश-वैद्युत धारा (photoelectric current) कहते हैं।

आइन्स्टीन के प्रकाश-वैद्युत समीकरण को व्युत्पन्न कीजिए।

आइन्सटीन की प्रकाश-वैद्युत समीकरण (Einstien’s Photoelectric Equation) – वैज्ञानिक आइन्सटीन ने प्रकाश-वैद्युत प्रभाव की व्याख्या प्रकाश के क्वाण्टम मॉडल के आधार पर इस प्रकार दी। जब कोई फोटॉन धातु की प्लेट पर गिरता है तो वह अपनी ‘समस्त ऊर्जा’ धातु के भीतर उपस्थित इलेक्ट्रॉनों में से किसी एक ही इलेक्ट्रॉन को स्थानान्तरित (transfer) कर देता है तथा ऊर्जा का कुछ भाग इलेक्ट्रॉन को धातु के अन्दर से बाहर निकालने में व्यय हो जाता है जो धातु का कार्य-फलन कहलाता है तथा शेष ऊर्जा उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन को उसकी गतिज ऊर्जा के रूप में प्राप्त हो जाती है जिससे इलेक्ट्रॉन धातु पृष्ठ से उत्सर्जित हो जाता है।

यही प्रकाश-वैद्युत प्रभाव है। चूँकि सभी इलेक्ट्रॉन धातु की सतह से ही उत्सर्जित नहीं होते; अतः धातु से विभिन्न ऊर्जाओं के इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं; क्योंकि जो इलेक्ट्रॉन धातु के भीतर से निकलकर सतह पर पहुँचते हैं वे सतह तक आने में धन आयनों व परमाणुओं से टकराते हैं; जिससे वे कुछ ऊर्जा खो देते हैं। अत: जो इलेक्ट्रॉन धातु की सतह से उत्सर्जित होते हैं, उनकी गतिज ऊर्जा अपेक्षाकृत अधिक होती है; क्योंकि उनकी ऊर्जा टकराने में नष्ट नहीं होती है। इस प्रकार धातु की ऊपरी सतह से उत्सर्जित प्रकाश इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है।


माना किसी धातु की सतह से उत्सर्जित किसी प्रकाश इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा Eₖ तथा इसको धातु के अन्दर से बाहर सतह पर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा W है। यहाँ W धातु का कार्य-फलन होगा। अत: आइन्सटीन द्वारा दी गयी प्रकाश-वैद्युत उत्सर्जन की उपर्युक्त व्याख्या के अनुसार इन दोनों प्रकार की ऊर्जाओं का योग ही धातु के अन्दर सतह के निकट इलेक्ट्रॉन द्वारा अवशोषित फोटॉन की ऊर्जा hv के बराबर होगा।

Eₖ+W = hv
अथवा Eₖ = hv-W …………(1)

समीकरण (1) से स्पष्ट है कि यदि प्रकाश फोटॉन की ऊर्जा hv कार्य-फलन W के बराबर है तो धातु की सतह से कोई भी इलेक्ट्रॉन नहीं निकलेगा। यदि दी हुई धातु के लिए देहली आवृत्ति v₀ है तो इस आवृत्ति का फोटॉन, इलेक्ट्रॉन v₀ को धातु की सतह तक लाने में ही समर्थ होगा, क्योंकि ऐसे फोटॉन की ऊर्जा hv₀ इलेक्ट्रॉन को धातु की सतह तक लाने में ही व्यय हो जाएगी। अतः सतह पर इसका वेग शून्य होगा, अर्थात् इस फोटॉन की ऊर्जा hv₀ धातु के कार्य-फलन के बराबर होगी।

अत: W = hv₀
w का मान समी० (1) में रखने पर
Eₖ = hv – hv₀
अथवा Eₖ = h(v-v₀) ……….(2)

यदि धातु की सतह पर निकलने वाले इलेक्ट्रॉन का अधिकतम वेग v max तो इसकी अधिकतम गतिज ऊर्जा Eₖ = (1/2) mvmax² होगी। Eₖ का यह मान उपर्युक्त समी० (2) में रखने पर
(1/2)mv²max = h(v – v₀) …………(3)

इस समीकरण को आइन्सटीन की प्रकाश-वैद्युत समीकरण’ (Einstien’s photoelectric equation) कहते हैं।

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प्रश्न 1- क्रान्तिक कोण तथा पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से क्या अभिप्राय है ? सिद्ध कीजिए कि n=1/ sinc , जहाँ संकेतों के सामान्य अर्थ हैं।

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प्रश्न 4-पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से आप क्या समझते हैं? इसकी आवश्यक शर्ते लिखिए। (2015, 18)