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force between two parallel current carrying conductors

force between two parallel current carrying conductors

प्रश्न – दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले बल F/L=μ₀i₁i₂/2πr न्यूटन/मीटर के लिए सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। उपर्युक्त L सूत्र के आधार पर धारा के एक ऐम्पियर की परिभाषा दीजिए।(2017, 19)

या

 दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच कार्य करने वाले बल का सूत्र ज्ञात कीजिए। (2012, 17, 18)

या

दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले बल के लिए सूत्र स्थापित कीजिए। इसके आधार पर वैद्युत धारा के मात्रक ऐम्पियर की परिभाषा दीजिए। (2013, 20)

या

L मीटर लम्बाई के दो समान्तर तारों, जिनके मध्य की दूरीrमीटर है तथा जिनमें i₁और i₂ ऐम्पियर की विद्युत धाराएँ प्रवाहित हैं, के  मध्य प्रति एकांक लम्बाई पर बल का सूत्र  F/L=μ₀i₁i₂/2πr व्युत्पादित कीजिए।(2015) या

या

दो समान्तर धारावाही लम्बे चालकों के बीच चुम्बकीय बल के लिए एक व्यंजक प्राप्त कीजिए। इसकी सहायता से एक ऐम्पियर की परिभाषा भी दीजिए। (2019)

उत्तर- माना दो लम्बे ऋजुरेखीय तार PQ तथा RS वायु या निर्वात् में एक-दूसरे के समीप परस्पर समान्तर रखे हैं। इनके बीच की दूरी rहै। माना PQ एवं RS में प्रवाहित धाराएँ क्रमशः i₁ एवं i₂ हैं। PQ में प्रवाहित धारा i₁ के कारण चालक RS के किसी भी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र 

B₁= μ₀i₁/2πir  (न्यूटन / ऐम्पियर-मीटर)

मैक्सवेल के दक्षिणावर्ती पेंच के नियम (अथवा दायें हाथ की हथेली के नियम नं० 1) के अनुसार B₁ की दिशा कागज के तल के लम्बवत् अन्दर की ओर होगी। अब चालक RS जिसमें धारा i₂ प्रवाहित हो रही है, चुम्बकीय क्षेत्र B₁ के लम्बवत् रखा है। अत: इसकी L मीटर लम्बाई पर लगने वाले बल का परिमाण

 F=i₂LB₁sin 90°

 F=i₂L(μ₀i₁/2πir)=(μ₀i₁i₂/2πr) Lन्यूटन

अतः चालक RS की प्रति मीटर लम्बाई पर कार्य करने वाला बल

 F/L=(μ₀i₁i₂/2πr)……….(1)

 अथवा  F/L=(μ₀2i₁i₂/4πr)……….(2)

इस बल की दिशा फ्लेमिंग के बायें हाथ के नियम (अथवा दायें हाथ की हथेली के नियम नं० 2) से प्राप्त होगी। यदि धाराएँi₁ एवं i₂समान दिशाओं में प्रवाहित हो रही हैं तो RS पर कार्यकारी बल की दिशा PQ की ओर होगी [चित्र (a)] और यदि i₁ एवं i₂ विपरीत दिशाओं में प्रवाहित हों तो बल PQ से दूर की ओर दिष्ट होगा [चित्र (b)]|

इसी प्रकार सिद्ध किया जा सकता है कि PQ की प्रति मीटर लम्बाई पर RS में प्रवाहित धारा i₂ के कारण बल

  F/L=(μ₀i₁i₂/2πr)……….(3)

 अथवा  F/L=(μ₀2i₁i₂/4πr)……….(4)

इसकी दिशा भी फ्लेमिंग के बायें हाथ के नियम अथवा दायें हाथ की हथेली के नियम नं0 2 से निर्धारित की जाएगी। यदि धारा i₂उसी दिशा में है जिसमें i₁ है तो PQ पर लगने वाला बल चालक RS की ओर दिष्ट होगा [चित्र (a)] और यदि यह विपरीत दिशा में है तो यह RS से दूर दिष्ट होगा[चित्र (b)]।

अतः उपर्युक्त विवेचना से यह स्पष्ट होता है कि यदि दो समान्तर तारों में धाराएँ एक ही दिशा में हैं तो वे एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं और यदि धाराएँ विपरीत दिशा में हैं तो तार एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।

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