forward biasing and reverse biasing

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forward biasing and reverse biasing

प्रश्न – उपयुक्त परिपथों की सहायता से p-n सन्धि डायोड में विद्युत धारा प्रवाह की व्याख्या कीजिए। (2013, 17, 18)forward biasing and reverse biasing
या
p-n सन्धि डायोड के लिए अग्र-अभिनति तथा उत्क्रम-अभिनति अवस्था में परिपथ चित्र खींचिए। (2012, 19)forward biasing and reverse biasing
या
P-n सन्धि डायोड के लिए अग्र-दिशिक तथा पश्च-दिशिक अवस्था में परिपथ आरेख खींचिए। दो अवस्थाओं हेतु प्राप्त अभिलक्षण वक्रों को समझाइए।(2015,17,18, 19,20)forward biasing and reverse biasing
या
p-n संधि डायोड के लिए अग्र-दिशिक परिपथ आरेख बनाइए (2017)forward biasing and reverse biasing

अग्र-अभिनति kya hota h ?

सन्धि डायोड को बाह्य बैटरी से दो विभिन्न प्रकारों से जोड़ा जा सकता है, जिन्हें ‘अग्र-अभिनति’ तथा ‘उत्क्रम-अभिनति’ कहते हैं।

अग्र-अभिनति (Forward Biasing) – जब सन्धि डायोड के p-क्षेत्र को बाह्य बैटरी के धन सिरे से तथा n-क्षेत्र को ऋण सिरे से जोड़ा जाता है तो सन्धि ‘अग्र-अभिनत’ (forward biased) कहलाती है

forward biasing and reverse biasing
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[चित्र (a)]। इस स्थिति में डायोड में एक बाह्य वैद्युत-क्षेत्र E स्थापित हो जाता है जोकि p-क्षेत्र से n-क्षेत्र की ओर को दिष्ट होता है। क्षेत्र E, आन्तरिक वैद्युत-क्षेत्र Eᵢ से कहीं अधिक प्रबल होता है। अत: p-क्षेत्र में (धन) कोटर तथा n-क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन दोनों ही सन्धि की ओर को चलने लगते हैं। (कोटर क्षेत्र E की दिशा में तथा इलेक्ट्रॉन E की विपरीत दिशा में चलते हैं।) ये कोटर तथा इलेक्ट्रॉन सन्धि के समीप पहुँचकर परस्पर संयोग करके विलुप्त हो जाते हैं।

प्रत्येक इलेक्ट्रॉनकोटर संयोग (combination) के लिए, p-क्षेत्र में बैटरी के धन सिरे के समीप एक सह-संयोजक बन्ध टूट जाता है। इससे उत्पन्न कोटर तो सन्धि की ओर चलता है, जबकि इलेक्ट्रॉन, जोड़ने वाले तार (connecting wire) में से होकर बैटरी के धन सिरे में प्रवेश कर जाता है। ठीक इसी समय बैटरी के ऋण सिरे से एक इलेक्ट्रॉन मुक्त होकर n-क्षेत्र में प्रवेश करता है तथा सन्धि के समीप संयोग द्वारा विलुप्त हुए इलेक्ट्रॉन का स्थान ले लेता है।

इस प्रकार, बहुसंख्यक वाहकों की गति से सन्धि डायोड में वैद्युत धारा स्थापित हो जाती है। इसे ‘अग्र-धारा’ (forward current) कहते हैं। (इस बड़ी धारा के अतिरिक्त, अल्पसंख्यक वाहकों की गति से भी एक अल्प उत्क्रम-धारा स्थापित होती है, परन्तु यह लगभग नगण्य ही होती है।) जैसा कि चित्र (a) से स्पष्ट है, बाह्य परिपथ में धारा केवल इलेक्ट्रॉनों की गति से स्थापित होती है। सन्धि पर आरोपित अग्र वोल्टेज तथा प्राप्त अग्र-धारा का ग्राफ चित्र (b) में दिखाया गया है।

अभिनति (Reverse Biasing) kya hota h ?

अभिनति (Reverse Biasing)—जब सन्धि डायोड के p-क्षेत्र को उत्क्रम बाह्य बैटरी के ऋण सिरे से तथा n-क्षेत्र को धन सिरे से जोड़ा जाता है तो सन्धि ‘उत्क्रम-अभिनत’ (reverse biased) कहलाती है।

forward biasing and reverse biasing
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चित्र (c)। इस स्थिति में बाह्य वैद्युत-क्षेत्र E, n-क्षेत्र से p-क्षेत्र की ओर को दिष्ट होता है तथा इस प्रकार यह आन्तरिक प्राचीर क्षेत्र Eᵢ की सहायता करता है। अब, p-क्षेत्र में कोटर तथा n-क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन दोनों ही सन्धि से दूर जाने लगते हैं। अत: वे कभी भी सन्धि के समीप संयोग नहीं कर सकते (cannot combine)। स्पष्ट है कि डायोड में बहुसंख्यक वाहकों के कारण कोई धारा नहीं होती।

परन्तु जब सन्धि उत्क्रम-अभिनत होती है तब सन्धि के आर-पार एक अति अल्प उत्क्रम धारा (≈ कुछ माइक्रोएम्पियर) बहती है। यह ऊष्मीय-जनित (thermally generated) अल्पसंख्यक वाहकों (p-क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन तथा n-क्षेत्र में कोटर) से उत्पन्न होती है जोकि वैद्युत क्षेत्र E के अन्तर्गत सन्धि को पार करते हैं। चूँकि अल्पसंख्यक वाहकों की संख्या ऊष्मीय विक्षोभ पर निर्भर करती है, अत: उत्क्रम-धारा ताप पर बहुत अधिक निर्भर करती है तथा सन्धि का ताप बढ़ने पर बढ़ती है। उत्क्रम वोल्टेज तथा उत्क्रम-धारा के बीच ग्राफ चित्र (b) में दिखाया गया है।

Some Important Physics Questions

प्रश्न 1- बन्धन ऊर्जा वक्र बनाइए तथा इसके आधार पर निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए