what is DNA in hindi | DNA kya hota hai free pdf 2022

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what is DNA in hindi

प्रश्न – DNA की संरचना का वर्णन कीजिए। इसका महत्त्व भी लिखिए।
डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल [Deoxyribonucleic Acid (DNA)]
डी० एन० ए० की खोज सर्वप्रथम फ्रेड्रिक मीस्वर (Fredrisch Meischer) ने की । यह केवल केन्द्रक में पाया जाता है। इसका निर्माण डीऑक्सीराइबोस शर्करा, फॉस्फेट तथा नाइट्रोजनी बेस (एडिनीन, ग्वानीन, साइटोसीन तथा थायमीन) से होता है । इसमें यूरेसिल का अभाव होता है ।

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DNA की आण्विक संरचना (Molecular Structureof DNA) : जे० डी० वाटसन (J. D. Watson) औरएच०एफ० सी० क्रिक (H.EC. Crick) ने सन् 1953 ई. में DNA की ने रचना के बारे में एक मॉडल प्रस्तुत किया जिसे उसके नाम पर वाटसन और क्रिक का मॉडल कहते हैं। इसके लिए वाटसन (Watson) एवं क्रिक (Crick) तथा विलकिन्स (Wilkins) को सम्मिलित रूप से सन् 1962 ई. में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। उनके अनुसार

1- DNA द्विचक्राकार रचना (Double helicalstructure) है, जिनमें पॉलीन्यूक्लियोटाइड के दोनों चेन एक अक्ष रेखा पर एक-दूसरे के विपरीत दिशा में कुण्डलित अथवा रस्सी की तरह ऐंठी हुई रहती हैं।
2- दोनों चेनों का निर्माण फॉस्फेट (P) एवं शर्करा (S) के कई अणु के मिलने से होता है । नाइट्रोजनी बेस शर्करा के अणुओं से पार्श्व में लगे होते हैं।
3- पॉलीन्यूक्लियोटाइड चेनों के बेस लम्बी अक्ष रेखा के सीधे कोणीय तल में लगे रहते हैं तथा सीढ़ी के डण्डे के आकार की रचना बनाते हैं !
4- दोनों चेन एक-दूसरे से दुर्बल हाइड्रोजन बन्धों द्वारा जुड़ी रहती हैं । ये बन्ध बेस के जोड़ों के बीच में पाए जाते हैं।

5- एडिनीन तथा थायमीन बेस के बीच में सदैव दो हाइड्रोजन बन्ध (A = T), इसी प्रकार ग्वानीन तथा साइटोसीन बेस के बीच में सदैव तीन बन्ध (G = C) पाए जाते हैं।
6- दोनों चेनों में एडिनीन (A) के अणु थायमी (T) से तथा ग्वानीन (G) के अणु सदैव साइटोसीन (C) से जुड़े रहते हैंऔर इस प्रकार सीढ़ी के समान रचना बनाते हैं।

7- DNA अणु में बेस के डण्डों की संख्या 100 से 2,00,000 तक हो सकती है
8- दो बेस जोड़ों के बीच की दूरी 3.4A तथा पूरे एक मोड़ की लम्बाई लगभग 34 A होती है । इस प्रकारप्रत्येक मोड़ में दस बेस जोड़े होते हैं । DNA के अणु का व्यास लगभग 20 A होता है।
एकसूत्री डी००एन०ए० (Single Stranded DNA) : कुछ वाइरस में अपवादस्वरूप पॉली डीऑक्सीराइबोन्यूक्लियोटाइड की एक श्रृंखला (single strand) होती है; जैसे- S 13 E. coliphage वाइरस । इनमें क्षारकों का अनुपात समान नहीं होता।

डी०एन०ए० का महत्त्व (Importance of DNA)
1- डी. एन. ए. का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य आनुवंशिक सूचनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचाना है।
2- डी. एन. ए. कोशिका की सभी जैविक क्रियाओं का नियन्त्रण तथा नियमन करता है।
3- डी० एनएआर०एन०ए० का संश्लेषण करता है। आर० एन० ए० प्रोटीन संश्लेषण के लिए अति आवश्यक होता है।
4- डी. एन. ए. स्वयं अपने संश्लेषण को निर्देशित करता है, इसे प्रतिकृति या अनुलिपिकरण (replication)कहते हैं

प्रश्न – DNA में Replication किस प्रकार होता है ?

उत्तर : – DNA का द्विगुणन (Duplication or Replication of DNA) : किसी DNA अणु से उसी प्रकार के DNA अणु के निर्माण को प्रतिकृति या द्विगुणन कहते हैं। द्विगुणन एक अर्द्ध-संरक्षी (Semi-conservative) क्रिया है जिसके फलस्वरूप निर्मित DNA के अणुओं में एक सूत्र पुराना मातृ DNA अणु का तथा दूसरा नवनिर्मित होता है । वाटसन एवं क्रिक ने DNA के प्रतिरूप और संरचना को समझाने के साथ ही एक अणु के द्विगुणन की क्रिया को भी निरूपित किया था। कॉर्नबर्ग (Kornberg), मेसेल्सन एवं स्टाहल (Meselson and Stahl, 1958) आदि वैज्ञानिकों ने इसकी विधि का वर्णन किया।
DNA के द्विगुणन में पहले दोनों शृंखलाओं के मध्य बने हाइड्रोजन बन्धों (hydrogen bonds) के खुल जाने का कारण इसका अलग-अलग होना है। अणु के एक सिरे पर यह क्रिया प्रारम्भ होती है और क्रमशः दूसरे सिरे तक चलती जाती है । इधर पहले सिरे पर उभरे हुए न्यूक्लियोटाइड्सपर नए न्यूक्लियोटाइड आकर जुड़ने लगते हैं। इस प्रकार,जुड़ने वाली नई-नई न्यूक्लियोटाइड इकाइयाँ पूर्वस्थित न्यूक्लियोटाइड की पूरक होती हैं अथवा जिस पर जुड़ने जा रही हैं उसकी जोड़ीदार ही होंगी। इससे नए बनने वाले दो DNA अणु पहले (मातृ अणु) केसमान तथा बिल्कुल एक जैसे होते हैं। यह विशेषता जोड़े बनाने की प्रक्रिया तथा उसकी निश्चितता के ऊपर निर्भर करती है । इसके कारण नया बनने वाला कुण्डल पुराने हटे हुए कुण्डल की तरह अथवा सामने वाले का पूरक कुण्डल (complimentary helix) होता है

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