what is temperature in hindi free pdf 2022

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what is temperature

तापमापन क्या है ? तापमापन के लिए तापमापी में पारा ही क्यों प्रयुक्त करते हैं? पारे का तापमापी बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर : तापमापन-किसी वस्तु के ताप को किसी यन्त्र द्वारा डिग्री में मापने को तापमापन कहते हैं। ताप मापन के लिए जो यन्त्र प्रयुक्त होता है उसे तापमापी कहते हैं। तापमापी में पदार्थ के किसी ऐसे गुण का उपयोग करते हैं, जो ताप-परिवर्तन के अनुपात में बदलता रहता है। इसे पदार्थ का तापमापक गुण कहते हैं। सामान्यतः तामापी बनाने के लिए पारे के ऊष्मीय प्रसार के गुण का प्रयोग किया जाता है। ऐसे तापमापी बनाने के लिए पारे के ऊष्मीय प्रसार के गुण का प्रयोग किया जाता है। ऐसे तापमापी को पारे का तापमापी कहते हैं।

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तापमापन के लिए तापमापी में पारा प्रयुक्त करने के कारण– इसके निम्नलिखित कारण हैं
(i) प्रति डिग्री ताप-वृद्धि पर पारे में प्रसार एकसमान होता है ।
(ii) अन्य द्रवों की अपेक्षा पारे का प्रसार अधिक है।
(iii) पारा काँच की नली की दीवारों से नहीं चिपकता।
(iv) चमकदार व अपारदर्शी होने के कारण काँच की नली में पारा आसानी से दिखाई देता है।

पारे का तापमापी-पारे का तापमापी बनाने के लिए एक बारीक,समान व्यास वाली, काँच की मोटी केशनली लेते हैं। इसके एक सिरे को बन्द करके एक घुण्डी (bulb) बना देते हैं खुले सिरे को केशनली में पारा भरने के लिए रखते हैं । बल्ब को गर्म करके उसकी वायु बाहर निकालते हैं तथा खुले सिरे के बीच में पारा रखकर बल्ब को ठण्डा होने देते हैं । इससे कुछ पारा बल्ब में आ जाता है इस क्रिया को कई बार दोहराने पर पूरा बल्ब पारे से भर जाता है। पारा भरने के बाद दूसरा सिरा भी पिघलाकर बन्द कर देते हैं। अंशांकन तापमापन के लिए थर्मामीटर को अंशांकित करना होता है ।

इसके लिए पहले थर्मामीटर के बल्ब को शुद्ध पिघलती हुई बर्फ में रखते हैं तथा केशनली में पारे के तल पर निशान लगाते हैं । इसे अधोबिन्दु अथवा हिमांक (ice point) कहते हैं। अब तापमापी के बल्ब को जल की वाष्प में रखते हैं तथा केशनली में पारे के ऊपरी तल पर निशान लगा देते हैं इसे ऊर्ध्वबिन्दु अथवा वाष्प बिन्दु (steam point) कहते हैं इन दोनों बिन्दुओं के बीच की दूरी को समान लम्बाई के भागों में बाँट कर निशान लगा देते हैं तथा ऐसे प्रत्येक भाग को अंश (degree) कहते हैं। पारे का यह तापमापी (चित्र 7.2) में दिखाया गया है ।

Short Questions and Answers……..

1-बर्फ को पिघलने से बचाने के लिए उसे कुचालक पदार्थ; जैसे बुरादा, टाट आदि से लपेटकर रखते हैं क्यों?
उत्तर : इसका कारण यह है कि लकड़ी का बुरादा व टाट ऊष्मा के कुचालक हैं, ये बाह्य वातावरण की ऊष्मा को बर्फ तक नहीं पहुँचने देते । बाह्य ऊष्मा न मिल पाने से बर्फ पिघलता नहीं है।

2- जाड़ों में हम सभी रजाई, कम्बल, ऊनी स्वेटर आदि का प्रयोग करते हैं क्यों?
उत्तर : इसका कारण यह है कि इनके रेशों में वायु भर जाती है । वायु ऊष्मा की कुचालक है, अतः यह हमारे शरीर की ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देती । इससे शरीर का ताप नियन्त्रित रखने में सहायता मिलती है और हम ठण्ड से बचे रहते हैं।

3- ठण्डे प्रदेशों में मकान दोहरी दीवार के बनाए जाते हैं क्यों?
उत्तर : इसका कारण यह है कि दीवारों के बीच में वायु की परत आ जाती है । वायु ऊष्मा की कुचालक होती है अतः यह कमरे के भीतर की ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देती।

4- जाड़ों में एक मोटी कमीज की अपेक्षा दो पतली कमीजें पहनना अधिक अच्छा लगता है क्यों?
उत्तर : इसका कारण यह है कि कमीजों के बीच में वायु की परत आ जाती है । वायु ऊष्मा की कुचालक है अतः यह हमारे शरीर की ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देती। अतः हमें ठण्ड कम लगती है।

5- चाय के प्याले चीनी मिट्टी के बनाए जाते हैं क्यों?
उत्तर : इसका कारण यह है कि चीनी मिट्टी ऊष्मा की कुचालक है।
इसीलिए प्याले की दीवारों द्वारा ऊष्मा चालन बहुत कम होता है जिससे चाय गर्म बनी रहती है और प्याला भी होंठों को कम गर्म लगता है।

6- समान ताप होने पर भी गर्मी में लोहा लकड़ी की अपेक्षा अधिक गर्म लगता है क्यों?
उत्तर : इसका कारण यह है कि लोहा ऊष्मा का सुचालक तथा लकड़ी ऊष्मा की कुचालक है । अतः जैसे ही हम लोहे को छूते हैं, उसकी ऊष्मा हमारे हाथ में प्रवाहित होने लगती है और लोहा गर्म लगता है,जबकि लकड़ी को छूने पर लकड़ी से हाथ में ऊष्मा प्रवाहित नहीं होती है अत: वह अपेक्षाकृत कम गर्म लगती है।

जाड़ों में इसके ठीक विपरीत होता है जाड़ों में हमारे शरीर का ताप वातावरण के ताप से अधिक होता है। अतः लोहे
को छूने पर हमारे हाथ की ऊष्मा लोहेमें प्रवाहित होने लगती है अतः लोहा ठण्डा लगता है,जबकि लकड़ी को छूने पर हमारे
शरीर की ऊष्मा लकड़ी में नहीं जा पाती,क्योंकि लकड़ी ऊष्मा की कुचालक है । अतः लकड़ी कम ठण्डी लगती है।

7- गर्म वस्तुओं को पकड़ने के लिए लकड़ी अथवा प्लास्टिक आदि के हत्थे लगाए जाते हैं क्यों?
उत्तर : इसका कारण यह है कि लकड़ी,प्लास्टिक अथवा एबोनाइट आदि ऊष्मा के कुचालक हैं अंगीठी,कपड़ों की प्रेस (इस्त्री), केतली,कुकर आदि के हैण्डिल इन कुचालक पदार्थों के बनाने से, ये गर्म वस्तु की बहुत कम ऊष्मा को हाथ में पहुँचने देते हैं। अत: हम गर्म वस्तुओं को आसानी से उठा सकते हैं |

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