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working of full wave rectifier in hindi

प्रश्न – p-n सन्धि डायोडों का प्रयोग करते हुए पूर्ण-तरंग दिष्टकारी का परिपथ चित्र बनाइए। इसकी कार्यविधि समझाइए।(2010, 11, 15, 18, 20).working of full wave rectifier in hindi
या
परिपथ आरेख खींचकर समझाइए कि एक सन्धि डायोड पूर्ण तरंग दिष्टकारी की भाँति कैसे कार्य करता है ? (2011, 19), working of full wave rectifier in hindi
या
p-n सन्धि डायोड का उपयोग पूर्ण तरंग दिष्टकारी के रूप में समझाइए। सम्बन्धित परिपथ भी खींचिए। (2013, 18, 19), working of full wave rectifier in hindi
या
परिपथ आरेख खींचकर pn सन्धि डायोड की पूर्ण तरंग दिष्टकारी के रूप में कार्यविधि समझाइए। (2013, 14, 18, 19), working of full wave rectifier in hindi
या
प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में परिवर्तित करने हेतु पूर्ण तरंग दिष्टकारी का परिपथ चित्र बनाकर इसकी क्रिया विधि संक्षेप में समझाइए। (2019, 20) working of full wave rectifier in hindi

p-n सन्धि डायोड क्या होता है?

उत्तर- p-n सन्धि डायोड–“जब एक p-प्रकार के अर्द्धचालक क्रिस्टल को किसी विशेष विधि द्वारा n-प्रकार के अर्द्धचालक क्रिस्टल के साथ जोड़ दिया जाता है, तो जिस स्थान पर क्रिस्टल एक-दूसरे से जुड़ते हैं, वह सन्धि कहलाती है।” इस संयोजन के वैद्युत लक्षण डायोड वाल्व की भाँति होते हैं, अतः इस संयोजन को सन्धि डायोड कहते हैं।

working of full wave rectifier in hindi
working of full wave rectifier in hindi

पूर्ण-तरंग दिष्टकरण में निवेशी प्रत्यावर्ती वोल्टेज के दोनों अर्द्ध-चक्रों के दौरान निर्गत धारा प्राप्त होती है। इसमें दो सन्धि डायोड इस तरह प्रयुक्त किये जाते हैं कि पहला डायोड धारा के पहले आधे चक्र का दिष्टकरण करता है और दूसरा डायोड दूसरे आधे चक्र का। इसका परिपथ चित्र में दिखाया गया है।

A.C. स्रोत को एक ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक कुण्डली से जोड़ते हैं तथा द्वितीयक कुण्डली के सिरों A व B के बीच दोनों डायोडों 1 तथा 2 के p-क्षेत्रों को जोड़ा जाता है तथा n-क्षेत्रों को आपस में जोड़ दिया जाता है। लोड प्रतिरोध RL को द्वितीयक कुण्डली के केन्द्रीय निष्कास (centre tap) T तथा n-क्षेत्रों के बीच जोड़ते हैं।

निवेशी वोल्टेज के पहले आधे चक्र के दौरान जब ट्रांसफॉर्मर का A सिरा, T के सापेक्ष धनात्मक तथा B सिरा T के सापेक्ष ऋणात्मक होता है तब डायोड 1 अग्र-अभिनत होता है और धारा प्रवाहित होने देता है, जबकि डायोड 2 उत्क्रम-अभिनत होता है और धारा प्रवाहित नहीं होने देता।

अत: लोड-प्रतिरोध RL में धारा C से D की ओर बहती है। दूसरे आधे चक्र के दौरान A सिरा T के सापेक्ष ऋणात्मक होता है तथा B सिरा धनात्मक होता है। अतः अब डायोड 1 उत्क्रम-अभिनत तथा डायोड 2 अग्र-अभिनत होता है। अब धारा डायोड 2 में से प्रवाहित होती है तथा RL में पुनः धारा C से D की ओर को बहती है।

RL में धारा की दिशा दोनों अर्द्धचक्रों में एक ही ओर रहती है; अत: RL पर निर्गत वोल्टता की दिशा एक ही प्राप्त होती है तथा पूर्ण-तरंग के लिए वोल्टता प्राप्त होती रहती है।

Physics Important Questions

1- p-n सन्धि डायोड का उपयोग करके अर्द्धतरंग दिष्टकारी का परिपथ चित्र खींचिए तथा इसकी कार्यविधि समझाइए।

2- p-n सन्धि का उपयोग करके अर्द्धतरंग दिष्टकारी का परिपथ चित्र खींचिए। निवेशी तथा निर्गत वोल्टताओं के तरंगरूप दिखाइए। क्या निर्गत वोल्टता शुद्ध दिष्ट वोल्टता होती है? (2016)

3- p-n सन्धि डायोड एक अर्द्धतरंग दिष्टकारी (Half wave rectifier) के रूप में

4- क्रान्तिक कोण तथा पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से क्या अभिप्राय है ? सिद्ध कीजिए कि n=1/ sinc , जहाँ संकेतों के सामान्य अर्थ हैं।

6– रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की व्याख्या कीजिए, तथा इसकी कमियों का उल्लेख कीजिए। (2015)

प्रश्न 6- हाइड्रोजन परमाणु की nवीं कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा Eₙ= -13.6/n² इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) सूत्र से दी जाती है। इसके आधार पर
(i) n=1,2,3,4,5,6 तथा ० के लिए विभिन्न ऊर्जा स्तरों की खींचिए।
(ii) विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक संक्रमणों द्वारा हाइड्रोजन परमाणु के उत्सर्जन स्पेक्ट्रम की लाइमन तथा बॉमर श्रेणियों को प्रदर्शित कीजिए।(2015, 17)

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